LIVE DAY-5 श्रीमद् भागवत कथा || श्री द्वारकाधीश मंदिर || कन्हैया लाल शर्मा
Pandit Kanhaiya lal
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शोभायात्रा , श्री गणपति पूजन , देव पूजन , पितृ पूजन , कथा प्रारंभ , शौनकादि ॠषि के द्वारा सूत से मानव कल्याणके लिए प्रश्न करना , देवी भक्ति का नारदजी से भेट , नारद जी का सनकादिक संवाद , गोकर्ण जी के द्वारा धुंधुंकारी का मोक्ष , गोकर्ण गीता का उपदेश अपने पिता आत्मदेव जी को वैराग्य आना ओर मोक्ष पद की प्राप्ति ओर आरती प्वरसादके साथकथाविश्राम
भागवत् जी का शुभारंभ , मंगलाचरण के साथ कथा प्रांरभ , शौनकादि ॠषि के द्वारा सूत से मानव कल्याण के लिए 6 प्रश्न करना और सूत के द्वारा कथा श्रवण कराना , भगवान के 24 अवतारों का वर्णन,पांडवों का स्वर्गारोहण, ओर देवहूति भगवान कपिल संवाद व आरती के साथ कथा विश्राम ||
भगवान शुकदेव जी राजा परिक्षित को भगवान शिव के मना करने के बाद भी पितआ दक्ष के यज्ञ में जाना ओर देह त्याग की कथा श्रवण कराकर बाद भगवान शिव का विवाह की विस्तार से कथा श्रवण कराई राजा जड़ भरत जी की कथा सुनाई, राजा रहुगण ओर जड़ भरत जी संवाद, रहुगण भगवान कपिल से तत्व ज्ञान की सीख दी, अजमील की कथा श्रवण कराई भगवान के नाम के प्रताप से मोक्ष प्राप्त करना, ओर दुनिया को सिख दी कि कलियुग में भगवान का नाम जप जीवन की नैया पार करेगा ||
चतुर्थ दिवस की कथा में देवताओं का पूजन पितरों का पूजन करके सबसे पहले कथा प्रारंभ हुई हरि सुमिरन के साथ कथा में भक्त प्रहलाद एवं उनके पिता हिरण्यकश्यप का चरित्र का प्रसंग की कथा श्रवण करते हुए नवधा भक्ति उनके साथ मां मीराबाई की कथा श्रवण की आगे गज और ग्रह की कथा श्रवण की उसके बाद भगवान वामन की कथा और राजा बलि का तीन पद भूमि मांग कर उनको पाताल लोक का राज्य दिया उनके बाद राम कथा श्रवण किया उसके बाद जब धरती पर पाप बड़ा संतों पर विपदा आई गौ माता के ऊपर विपदा आई तब विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार उसके बाद ठाकुर जी का बड़े धूमधाम से कृष्ण जन्म मनाया गया ||
पंचम दिवस में देव पूजन ओर पितृ पूजन कर के पंचम दिवस की कथा में प्रवेश करके भगवान कृष्ण ओर बलराम जी का गर्गाचार्य जी नाम करण करते हैं , पुतना को मोक्ष देना, शकटासुर वध, तृणावत का वध, यमलार्जुन को परम गति, गोपियों के घर भगवान माखन लीला करते हुए, देवराज इन्द्र का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान गोवर्धन पुजन करवाना ओर 56 भोग गोवर्धन जी के लगाना ओर देवराज इन्द्र माँ कामधेनु के साथ आकर भगवान कृष्ण से क्षमा याचना करना ओर आरती प्रसाद के साथ पंचम दिवस की कथा विश्राम
षष्ठम दिवस की कथा में देव पुजन पितृ पूजन करके मंगलाचरण करके कथा प्रारंभ हुई भगवान ने इंद्र पुजा बंद करवा कर श्री गोवर्धन पूजा की 56 भोग धराकर गोवर्धन पूजा समपन्न की फिर देवराज इंद्र को अहंकार आता है फिर भगवान कृष्ण देवराज इन्द्र का अंहकार भंग करते हैं ओर भगवान कृष्ण वृंदावन जाकर महारास की लीला करते हैं फिर अक्रुर जी आते मथुरा से ओर फिर दाऊ भैया को ओर श्री कृष्ण को लेकर मथुरा जाना कंस का उद्धार करना ओर फिर जरासंध के आक्रमण से भगवान कृष्ण मथुरा को छोड़कर श्री द्वारिकापुरी का निर्माण करवा कर मथुरा वासियों को द्वारिकापुरी पहुँचाना ओर भगवान श्री कृष्ण कालयवन का मुचुकुन्द से उद्धार करवा कर भगवान ने रण छोड़ कर नया नामकरण करवाया श्री रणछोड़ राय जी फिर श्री रुकमणी जी भगवान कृष्ण को अपना पति परमेश्वर मान लेती है ओर भगवान कृष्ण उनको हरण करके वेदिक विद्धी से विवाह करते हैं इसके साथ षष्ठम दिवस की कथा का विश्राम होता है ||
सप्तम दिवस की कथा में देव पुजन पितृ पूजन करके मंगलाचरण करके कथा प्रारंभ हुई भगवान शुकदेव जी ने राजा परिक्षित को कथा सुनाते हुए भगवान कृष्ण नरकासुर ( भोमासुर ) राक्षस का वध करके भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह की कथा श्रवण कराई कुल का वर्णन किया फिर गृहस्थी धर्म के बारे में विस्तृत कथा सुनाई बाद में फिर सुदामा कृष्ण की मित्रता के विस्तार से वर्णन किया कलियुग के गुणों ओर अवगुणों का वर्णन किया ओर नव योगेश्वर ओर अवधूतो की कथा सुनाते हुए भगवान कृष्ण पृथ्वी लोक छोड़कर गोलोक पधारना फिर पांडव परिक्षित जी राज्य देकर हिमालय की यात्रा जाना ओर श्राप के कारण परिक्षित जी को शुकदेव जी ने कथा श्रवण कराई परिक्षित जी का मोक्ष जनमेजय सर्पसत्र यज्ञ करना ओर कथा का विश्राम करके आरती प्रसाद वितरण ओर पोथीयात्रा करके कथा विश्राम
चतुर्थ दिवस की कथा में देवताओं का पूजन पितरों का पूजन करके सबसे पहले कथा प्रारंभ हुई हरि सुमिरन के साथ कथा में भक्त प्रहलाद एवं उनके पिता हिरण्यकश्यप का चरित्र का प्रसंग की कथा श्रवण करते हुए नवधा भक्ति उनके साथ मां मीराबाई की कथा श्रवण की आगे गज और ग्रह की कथा श्रवण की उसके बाद भगवान वामन की कथा और राजा बलि का तीन पद भूमि मांग कर उनको पाताल लोक का राज्य दिया उनके बाद राम कथा श्रवण किया उसके बाद जब धरती पर पाप बड़ा संतों पर विपदा आई गौ माता के ऊपर विपदा आई तब विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार उसके बाद ठाकुर जी का बड़े धूमधाम से कृष्ण जन्म मनाया गया ||