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बादळी घिर आई रे | राजस्थानी बारहमासा विरह गीत | पिव म्हारो घर ना आया | Rajasthani Folk Song

Sehra Musical

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बादळी घिर आई रे | राजस्थानी बारहमासा विरह गीत | पिव म्हारो घर ना आया | Rajasthani Folk Song

485 просмотров · 6 дн. назад
Sehra Musical
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बादळी घिर आई रे, पिव म्हारो घर ना आया... ❤️‍🩹 यह एक मार्मिक राजस्थानी बारहमासा / चौमासा विरह गीत है, जिसमें सावन-भादो की घटाएँ, मोर की पुकार, जेठ की तपती लू, अषाढ़ की आस और जाड़े की लंबी रातों के बीच अपने पिया की प्रतीक्षा करती नायिका के विरह को प्रस्तुत किया गया है। मेघ बरसते हैं, मोर नाचते हैं, ऋतुएँ बदलती हैं, लेकिन पिया परदेस से वापस नहीं आते। बारह महीनों का यह इंतज़ार राजस्थानी लोक-संस्कृति की भावनाओं और विरह की मार्मिक अनुभूति को दर्शाता है। 🎵 गीत: बादळी घिर आई रे 🎶 शैली: राजस्थानी लोकगीत / बारहमासा / चौमासा विरह गीत 🏜️ भाव: प्रेम, प्रतीक्षा और विरह 🌧️ विषय: सावन, बादल, मोर, पपीहा और पिया की प्रतीक्षा अगर आपको राजस्थानी लोकगीत और पारंपरिक लोक-संगीत पसंद है, तो वीडियो को Like करें, Comment करें और Channel को Subscribe करें।