Navratri Day 3 | माँ चंद्रघंटा की कथा | साहस, शक्ति और भय पर विजय
सनातन काल | युगों से परे, सनातन की खोज
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Navratri Day 3 | माँ चंद्रघंटा की कथा | साहस, शक्ति और भय पर विजय
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नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं माँ चंद्रघंटा, जो साहस, रक्षा, आत्मबल और अधर्म के विनाश का प्रतीक हैं।
इस वीडियो में जानिए माँ चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप, उनके मस्तक पर सुशोभित अर्धचंद्र का अर्थ, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ा प्रसंग, और क्यों उनका योद्धा रूप भक्तों को निर्भय बनने की प्रेरणा देता है।
माँ चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि सच्चा साहस डर का न होना नहीं, बल्कि डर के बावजूद सही के लिए खड़े रहना है।
हमारे जीवन में भी भय, असुरक्षा, आत्मविश्वास की कमी और अन्याय के सामने चुप रहना ऐसे ही भीतर के राक्षस हैं, जिन पर हमें विजय पानी है।
🙏 मंत्र:
ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥
🌺 जय माता दी
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