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हुआ सवेरा अब उठ जाओ | मंगल प्रभाती - बाल गीत | ब्र. रवीन्द्रजी आत्मन् | Hua Savera Ab Uth Jaao |

Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji

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हुआ सवेरा अब उठ जाओ | मंगल प्रभाती - बाल गीत | ब्र. रवीन्द्रजी आत्मन् | Hua Savera Ab Uth Jaao |

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Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
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हुआ सबेरा अब उठ जाओ, पंच प्रभु का ध्यान लगाओ ॥ टेक ॥। तत्त्वों का चिन्तन भी करना, भेदज्ञान हृदय में धरना । लक्ष्य सु जीवन का दोहराओ ।। हुआ. ।। 1 ।। निज दोषों की निंदा करना, दृढ़ संकल्प पूर्वक तजना । निर्मल निज परिणाम बनाओ ।। हुआ. ।। 2 ।। कर्मबन्ध भावों से होता, अरे आलसी जीवन खोता । मोहादिक दुर्भाव नशाओ ।। हुआ. ।। 3 ।। अन्य न कोई सुख-दुख दाता, व्यर्थ मूढ़ भव में भरमाता । निज में ही उपयोग लगाओ ।। हुआ. ।। 4 ।। पर से कुछ भी नहीं सम्बन्ध, शुद्धातम है सदा अबन्ध । आतम अनुभव अब प्रगटाओ ।। हुआ. ।। 5 ।। रखना मन में नहीं कामना, भाना नित वैराग्य भावना । शुद्धातम में ही रम जाओ ।। हुआ. ।। 6 ।। आतम ही परमातम समझो, व्यर्थ विकल्पों में मत उलझो । खुद ही परमातम बन जाओ ।। हुआ. ।। 7 ।। स्रोत :" प्रेरणा " पाठ क्रमांक: ०२ रचयिता: बाल ब्र. श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्’ ———————————————————————— Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji ‘Aatman’ Singer – Vandana Parakh, Rajnandgaon Chorus – Anamika Bardiya Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon