🦚 बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर | मन को छू लेने वाला कृष्ण भजन | Official Bhajan
भजनलोक
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🦚 बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर | मन को छू लेने वाला कृष्ण भजन | Official Bhajan
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🙏 राधे राधे | जय श्री कृष्ण 🙏
“बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर” — एक भावपूर्ण कृष्ण
भजन, जो हमें बाहरी दुनिया में श्याम को खोजने के बजाय अपने ही हृदय में बसे कान्हा का अनुभव करने की प्रेरणा देता है। 🦚💛
मथुरा, गोकुल और वृंदावन की गलियों में खोजते-खोजते जब मन भीतर की ओर मुड़ता है, तब एहसास होता है कि मेरे श्याम तो मेरी हर सांस, हर धड़कन और मेरे हृदय में ही बसे हैं। 🙏
🎵 भजन: बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर
🦚 आराध्य: श्री राधे कृष्ण
🌸 भाव: भक्ति • प्रेम • आत्मज्ञान • परम शांति
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॥ राधे राधे ॥
॥ जय श्री कृष्ण ॥ 🦚🙏
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