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🦚 बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर | मन को छू लेने वाला कृष्ण भजन | Official Bhajan

भजनलोक

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🦚 बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर | मन को छू लेने वाला कृष्ण भजन | Official Bhajan

309 просмотров · 7 дн. назад
भजनलोक
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🙏 राधे राधे | जय श्री कृष्ण 🙏 “बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर” — एक भावपूर्ण कृष्ण भजन, जो हमें बाहरी दुनिया में श्याम को खोजने के बजाय अपने ही हृदय में बसे कान्हा का अनुभव करने की प्रेरणा देता है। 🦚💛 मथुरा, गोकुल और वृंदावन की गलियों में खोजते-खोजते जब मन भीतर की ओर मुड़ता है, तब एहसास होता है कि मेरे श्याम तो मेरी हर सांस, हर धड़कन और मेरे हृदय में ही बसे हैं। 🙏 🎵 भजन: बाहर ढूँढूँ काहे को, कान्हा बसा है भीतर 🦚 आराध्य: श्री राधे कृष्ण 🌸 भाव: भक्ति • प्रेम • आत्मज्ञान • परम शांति अगर यह भजन आपके मन को छू जाए तो ❤️ Like करें 🔔 Subscribe करें 📲 अपने प्रियजनों के साथ Share करें। ॥ राधे राधे ॥ ॥ जय श्री कृष्ण ॥ 🦚🙏 #KrishnaBhajan #RadhaKrishna #ShyamBhajan #KrishnaSong #Bhajan #RadheRadhe #JaiShreeKrishna #HindiBhajan #DevotionalSong #BhaktiGeet #KrishnaBhakti #NewBhajan #OfficialBhajan #Kanha #Shyam