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आ माँ आकर जग सँवार | Aa Maa Aakar Jag Sanwar | Nature & World Peace Devotional Durga Bhajan #durga

Shabd-Sur

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आ माँ आकर जग सँवार | Aa Maa Aakar Jag Sanwar | Nature & World Peace Devotional Durga Bhajan #durga

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Shabd-Sur
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आ माँ आकर जग सँवार | Aa Maa Aakar Jag Sanwar | Paryavaran & World Peace Divine Bhajan "कण-कण में तू, क्षण-क्षण में तू, तू ही चर-अचर का विस्तार..." यह भजन प्रकृति (धरती, जल, आकाश, वायु, अग्नि) की दुर्दशा और आधुनिक समय के संकटों—प्रदूषण, युद्ध और विनाश—के बीच जगदम्बा माँ दुर्गा से जग के कल्याण और विश्व शांति की एक भावपूर्ण पुकार है। अगर यह भजन आपके हृदय को छूता है, तो इसे शेयर करें, लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें! 🙏✨ 🎵 Song Credits: Song Title: Aa Maa Aakar Jag Sanwar (आ माँ आकर जग सँवार) Concept & Lyrics: Sanjeev Singh Music / Composition: [संगीतकार का नाम लिखें] Category: Devotional / Environmental Prayer / World Peace Bhajan 📜 Lyrics / भजन के बोल: [मुखड़ा] कण-कण में तू, क्षण-क्षण में तू, तू ही चर-अचर का विस्तार। तेरी ही ज्योति से आलोकित, नभ, धरा, जल, पवन, अंगार। तेरी शक्ति को आज पुकारे, व्याकुल होकर यह संसार— आ माँ, आकर जग सँवार॥ [अंतरा १ — धरा] वन कटते, उपवन उजड़ते, छिनती शीतल छाया। पर्वत के उर पर घाव पड़े हैं, धरती ने बड़ा दुःख पाया। माटी की कोख हुई घायल, रूठी ऋतु की बहार— माँ, अपनी हरित चूनर ओढ़ा, फिर सजा दे धरा-संसार॥ आ माँ, आकर जग सँवार॥ [अंतरा २ — जल] निर्मल गंगा, यमुना रोतीं, मैली हुईं जलधार। कचरे से कराह रहा है, यह तेरा सागर अपार। विष से व्याकुल मीन-मगर हैं, मुरझाए कमल हजार— माँ, अपनी करुणा से धो दे, फिर निर्मल हो जलधार॥ आ माँ, आकर जग सँवार॥ [अंतरा ३ — आकाश] धूमिल नभ, तारे ओझल, धुँधला पड़ा विहान। पक्षी खोजें अपना नभ, थम गयी उनकी उड़ान। ऋतुओं की लय टूट रही है, बदला प्रकृति का व्यवहार— माँ, फिर नील गगन कर दे तू, फिर भर दे तारों की झंकार॥ आ माँ, आकर जग सँवार॥ [अंतरा ४ — वायु] साँसों में घुलता विष धीरे, घुटने लगा है अब संसार। शुद्ध हवा को तरसे प्राणी, थमने लगी जीवन रफ़्तार। फूलों की गंध हुई बेगानी, रोता उपवन और कछार— माँ, फिर शीतल पवन बहा दे, हर ले जीवन का भार॥ आ माँ, आकर जग सँवार॥ [अंतरा ५ — अग्नि] बारूदों से धधक रही है, धरती की छाती आज। गोले बरसें, नगर जलें, काँपे सारा जीवन-साज। सीमा-सीमा रक्त बह रहा, बिखरे घर-परिवार— माँ, बुझा दे यह विनाशाग्नि, जगा शांति का उजियार॥ आ माँ, आकर जग सँवार॥ [समापन] तेरी ही रचना तेरे द्वारे, माँ, आज खड़ी है लाचार। कहीं कराहे सूखी धरती, कहीं विषैली है जलधार। कहीं धुआँ है, कहीं अँधियारा, कहीं धधकती दिखे अंगार, माँ, अपनी शक्ति फिर जगा दे, कर दे निर्मल यह संसार। टूटे जीवन, बिखरेसपने, फिर से पाएँ अपना आकार— तेरी करुणा से फिर मुसकाए, सृष्टि का कण-कण साकार। कण-कण में तू, क्षण-क्षण में तू, तू ही चर-अचर का विस्तार— तेरी शक्ति को आज पुकारे, आ माँ, आकर जग सँवार॥ 🏷️ Hashtags: #MaaDurgaBhajan #AaMaaAakarJagSanwar #EnvironmentBhajan #WorldPeacePrayer #ParyavaranBhajan #DevotionalSong #DurgaPuja #Prarthana #SaveEarth #PeaceSong2026