शिवरात्रि में करे शिवाभिषेक | शिवरात्रि कब है ? किस समय मंत्र साधना करे ? Shiv Abhishek |
Karmkand By Anandpathak
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शिवरात्रि कब है ?
शिव अभिषेक स्तोत्र
शिवरात्रि में करे शिवाभिषेक
किस समय मंत्र साधना करे ?
शिवरात्रि शुभमुहूर्त
शिवरात्रि का महत्व
जैसे रात्रि सूक्तम में कहा है
"कालरात्रि र्महारात्रि मोहरात्रिश्च दारूणा"
क्युकी इस शिवरात्रि पर शनि स्वयं की राशि मकर में स्थित है,और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में होगा |
इस तरह से शिवरात्रि में शनि-चंद्र का शश योग या विष योग बन रहा है
जिनकी कुंडली में विषयोग है - शनि-चंद्र एक साथ युति में है तो उनके लिए यह एक सर्वोत्तम उपासना का दिन है
और जिनकी जन्मकुंडली में केमन्द्रम योग है उन्हें भी अवश्य मंत्र साधना करनी चाहिए
और केवल इतनाही नहीं सर्वार्थसिद्धि योग भी है और इस योग में शिव-पार्वती का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना गया है तो अवश्य इस दिन का लाभ लेना चाहिए |
शिवरात्रि का शुभ समय
शाम ०५:२०:२२ सेकंड से शुरू होकर सुबह ०४:४२:०१ तक है
किन्तु विशेष रूप से रात ११ बजे से ०१:३० तक निरंतर उपासना करे
क्युकी इस समय पर आध्यात्मिक शक्तिया जागृत होती है |
शिव-शक्ति के संयोग की उत्तम रात्रि मानी जाती है
इस समय में शिवपञ्चाक्षरी साधना करनी चाहिए
शिवपाशुपतास्त्र मंत्र साधना करे
शिवजी पर अभिषेक करे
जिनकी कुंडली में चंद्र दुर्बल है उन्हें दूध से अभिषेक करना चाहिए
जिन्हे लक्ष्मी की प्राप्ति करनी है उन्हें शक्कर और गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए
पंचामृत से भी अभिषेक करने से सर्वसिद्धि प्राप्ति होती है
गङ्गाजल से अभिषेक करने से सर्वकार्य सिद्धि और शिवकृपा प्राप्त होती है
शिव अभिषेक स्तोत्र
एक बहुत ही उत्तम स्तोत्र जो महाभारत के द्रोणपर्व में अर्जुन द्वारा रचित है | इसी स्तोत्र के माध्यम से अर्जुन ने शिव को प्रसन्न किया था और युद्ध में विजय प्राप्त किया | इस स्तोत्र की खासियत है की जैसी जिसकी मनोकमना होती है उस हिसाब से द्रव्यों के द्वारा अभिषेक करके मनोकामना की पूर्ति की जाती है |
शिव अभिषेक के लिये गोश्रृंगि का प्रयोग करे |
शिव अभिषेक स्तोत्र
इन द्रव्यों से करे अभिषेक
अक्षत से अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति होती है |
बिल्वपत्र से अभिषेक करने से अर्थात इस स्तोत्र द्वारा शिव को अर्पण करने से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है |
दूर्वा से अभिषेक करने से दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है |
काले तिल से अभिषेक करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है |
( काले तिल को दूध या जल में मिश्रित कर अभिषेक कर सकते है )
सिर्फ दूध से अभिषेक करने से रोग मुक्ति होती है, देह स्वस्थ रहता है |
घी से अभिषेक करने से राजयोग प्राप्त होता है राजाओ के जैसा सुख प्राप्त होता है |
दर्भ ( कुशा ) से अभिषेक करने से शत्रुओ का विनाश हो जाता है |
भगवान् शिव का सबसे प्रिय गंगाजल से अभिषेक करने से सम्पूर्ण शिव कृपा प्राप्त होती है | - लक्ष्मी प्राप्ति के लिये गन्ने के रस से अभिषके करे |
सर्व कामनाओ की पूर्ति करने के लिये पंचामृत से अभिषेक करे |
इस स्तोत्र के कितने पाठ करने चाहिये ?
इस स्तोत्र के 11 पाठ या अभिषेक करने से रुद्राभिषेक का फल प्राप्त होता है |
इस स्तोत्र का 121 पाठ करने से एक लघुरुद्र का फल प्राप्त होता है |
भगवान् शिव को गोश्रृंगि या ताम्र कलश से अभिषेक करे
|| शिवरूद्राभिषेक स्तोत्र ||
डिस्क्रिप्शन में दिया हुआ है
ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च |
पशूनां पतये नित्यं उग्राय च कपर्दिने || 1 ||
महादेवाय भीमाय त्र्यंबकाय शिवाय च |
ईशानाय मखध्नाय नमस्ते मखधातिने || 2 ||
कुमार गुरुवे नित्यं नीलग्रीवाय वेधसे |
विलोहिताय धूम्राय व्याधीने न पराजिते || 3 ||
नित्यं नीलशिखण्डाय शुलिने दिव्यचक्षुसे |
हन्त्रे गोप्त्रे त्रिनेत्राय व्याधाय च सुरेतसे || 4 ||
अचिन्त्याम्बिकाभर्त्रे सर्व देव स्तुताय च |
वृषभध्वजाय मुण्डाय जटिने ब्रह्मचारिणे || 5 ||
तप्तमानाय सलिले ब्रह्मण्याय जिताय च |
विश्वात्मने विश्वसृजे विश्वमावृत्य तिष्ठते || 6 ||
नमो नमस्ते सत्याय भूतानां प्रभवे नमः |
पञ्चवक्त्राय शर्वाय शंकराय शिवाय च || 7 ||
नमोस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नमः |
नमो विश्वस्यपतये महतां पतये नमः || 8 ||
नमः सहस्त्रशीर्षाय सहस्त्रभुजमन्यवे |
सहस्त्र नेत्रपादाय नमः सांख्याय कर्मणे || 9 ||
नमो हिरण्यवर्णाय हिरण्यकवचाय च |
भक्तानुकम्पिने नित्यं सिध्यतां नो वर प्रभो || 10 ||
एवं स्तुत्वा महादेवं वासुदेवः सहार्जुनः |
प्रसादयामास भवं तदा शस्त्रोपलब्धयै || 11 ||
|| रुद्राभिषेक संपूर्ण ||
|| अस्तु ||
|| जय श्री कृष्ण ||
इस तरह से इस रुद्राभिषेक का सम्पूर्ण अभिषेक करना चाहिये |
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