भजन-राज में IAS पति, IPS पत्नी पर करोड़ों की मेहरबानी किसकी? खुल गया 40 Villa का खेल! बड़ा एक्शन!
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एक तरफ राजस्थान की सत्ता में बैठे बड़े अफसर... दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की संपत्तियां... और बीच में एक ऐसी कंपनी, जिससे कथित तौर पर 40 विला और कॉटेज खरीदे गए और फिर उन्हीं संपत्तियों को वापस उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया। अब इस पूरे मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB कर रही है। IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर APO किए जा चुके हैं। दोनों को सरकार ने सात दिन में संपत्तियों का हिसाब देने का नोटिस भी दिया है। लेकिन कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सरकार ने संबंधित कंपनी को मिलने वाली करोड़ों की सरकारी रियायतों पर भी रोक लगा दी। अब सवाल है कि आखिर इन 40 विला के सौदे में ऐसा क्या है, जिसने राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी?
इस पूरे मामले की शुरुआत होती है उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ से। आरोप है कि IAS शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और परिवार के दूसरे सदस्यों ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से कुल 40 विला और कॉटेज खरीदे। इनमें उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज और अलवर के अजबगढ़ में 20 विला शामिल बताए गए हैं। इनकी कुल खरीद कीमत करीब 6 करोड़ 16 लाख रुपये बताई गई है।
लेकिन इस सौदे की सबसे अहम बात सिर्फ खरीद नहीं थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इन संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया। लीज की शर्तों के अनुसार, उदयपुर के कॉटेज से सालाना करीब 80 लाख रुपये और अलवर के विला से करीब एक करोड़ रुपये की आय तय होने की बात सामने आई। यानी कुल सालाना किराया करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद कीमत बाजार भाव के मुकाबले कितनी थी और इस पूरे सौदे की आर्थिक शर्तें क्या थीं।
अब आते हैं इस मामले के सबसे गंभीर आरोप पर। ACB की प्रारंभिक जांच में आरोप लगाया गया है कि शिखर अग्रवाल ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाया। कंपनी के रिसॉर्ट्स के निर्माण नियमों में कथित छूट, जरूरी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना मंजूरियां और विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जैसे पहलुओं की जांच हो रही है। ACB का कहना है कि इन कथित फैसलों से सरकारी खजाने को नुकसान और कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचने की आशंका है।
जांच में एक और अहम तारीख सामने आई है—27 मार्च 2026। ACB के मुताबिक, इसी दिन कंपनी को वित्त विभाग की ओर से विशेष रियायती पैकेज जारी हुआ और इसी दिन 20 विला की रजिस्ट्री होने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसी अब इस तारीख और दोनों घटनाओं के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 28 अक्टूबर को शिखर अग्रवाल को APO कर दिया। 30 अक्टूबर को सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत जांच की पूर्व मंजूरी दी। 31 अक्टूबर को उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया। इसके बाद 30 अक्टूबर को जारी कारण बताओ नोटिस के जरिए दोनों से 2021 के बाद खरीदी गई अचल संपत्तियों और उनके संपत्ति विवरण में जानकारी नहीं होने को लेकर सात दिन में जवाब मांगा गया।
इधर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम के तहत मिलने वाले कस्टमाइज्ड पैकेज पर भी रोक लगा दी गई है। ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को इस पैकेज के तहत कोई लाभ या भुगतान नहीं मिलेगा।
और अब ताजा अपडेट ये है कि ACB जांच के लिए अलग-अलग विभागों से रिकॉर्ड जुटा रही है। जमीन की रजिस्ट्री, जमीन के कन्वर्जन, निर्माण की मंजूरी, संपत्ति के ब्योरे और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक से भी दस्तावेज मांगे जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिखर अग्रवाल फिलहाल विदेश में हैं और उनके लौटने पर पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में जांच जारी है। अभी आरोपों को अदालत में साबित नहीं किया गया है और न ही अंतिम दोषसिद्धि हुई है। लेकिन 40 विला की खरीद, उसी कंपनी को लीज पर देने, सरकारी रियायतों और संपत्ति के खुलासे को लेकर उठे सवालों ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि ACB की जांच में कौन-कौन से दस्तावेज सामने आते हैं और क्या यह मामला सिर्फ संपत्ति के सौदे तक सीमित रहता है या फिर सरकारी फैसलों और कथित लाभ के बीच कोई ठोस कड़ी भी सामने आती है।
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