दो बैलों की कथा Class 9 Hindi Kshitij | Easy & Complete Explanation | Premchand Ki Kahani
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दो बैलों की कथा Class 9 Hindi Kshitij | Easy & Complete Explanation | Premchand Ki Kahani
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Do Bailon Ki Katha (दो बैलों की कथा) Class 9 Hindi Kshitij Chapter 1 Summary
इस वीडियो में मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानी "दो बैलों की कथा" (Do Bailon Ki Katha) का आसान भाषा में पूरा सारांश (Summary) समझाया गया है।
यह वीडियो Class 9 Hindi (Kshitij Part 1) के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
📌 Topics Covered in this Video:
हीरा और मोती की अटूट मित्रता
झूरी का प्रेम और बैलों का समर्पण
कहानी का मुख्य संदेश और स्वतंत्रता का महत्व
Class 9 Hindi Kshitij Chapter 1 Full Summary
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जानवरोों मेें गधा सबसे ज््ययादा बद्
ुधिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को परले
दरजे का बेवकूफ कहना चाहते हैैं, तो उसे गधा कहते हैैं। गधा सचमच बेवक ु ूफ है, या उसके
सीधेपन, उसकी निरापद सहिष््णता ने उसे
णु यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीीं किया
जा सकता। गायेें सीींग मारती हैैं, ब््ययाई हुई गाय तो अनायास ही सिं
हनी का रूप धारण कर
लेती है। कुत्ता भी बहु
त गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता
है; किंत गधे को कभी
ु क्रोध करते नहीीं सना, न ु देखा। जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे
जैसी खराब, सड़़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असं
तोष की छाया भी
न दिखाई देगी। वैशाख मेें चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता हो; पर हमने तो उसे कभी
खशु होते नहीीं देखा। उसके चेहरे पर एक स््थथायी विषाद स््थथायी रूप से छाया रहता है।
सख-द ु ख, हा ु नि-लाभ, किसी भी दशा मेें उसे बदलते नहीीं देखा। ॠषियोों-मनियो ु ों के जितने
गणु हैैं, वे सभी उसमेें पराकाष््ठठा को पहुँच गए हैैं; पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है। सदग्णोुों
का इतना अनादर कहीीं नहीीं देखा। कदाचित सीधापन सं
सार के लिए उपयक्तु नहीीं है। देखिए
न, भारतवासियोों की अफ्रीका मेें क््यया दर््दशु ा हो रही है? क््योों अमरीका मेें उन््हेें घसने न ु हीीं दिया
जाता? बेचारे शराब नहीीं पीते, चार पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैैं, जी तोड़कर काम
करते हैैं, किसी से लड़़ाई-झगड़़ा नहीीं करते, चार बातेें सनकर ग ु म खा जाते हैैं फिर भी बदनाम
हैैं। कहा जाता है, वे जीवन के आदर््श को नीचा करते हैैं। अगर वे भी इट का जवाब पत््थर
से देना सीख जाते, तो शायद सभ््य कहलाने लगते। जापान की मिसाल सामने है।
एक ही विजय ने उसे सं
सार की सभ््य जातियोों मेें गण््य बना दिया।
लेकिन गधे का एक छोटा भाई और भी है, जो उससे
कम ही गधा है, और वह है ‘बैल’। जिस अर््थ मेें हम
‘गधा’ शब््द का प्रयोग करते हैैं, कुछ उसी से
मिलते-जलते अ ु र््थ मेें ‘बछिया के ताऊ’
का भी प्रयोग करते हैैं। कुछ लोग
बैल को शायद बेवकूफोों
मेें सर््वश्ष्रेठ कहेेंगे; मगर
हमारा विचार ऐसा नहीीं