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माँ त्रिपुर सुन्दरी आरती | भक्ति माला | अवधूत प्रार्थना

आदि अवधूत

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माँ त्रिपुर सुन्दरी आरती | भक्ति माला | अवधूत प्रार्थना

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आदि अवधूत
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॥ श्री आदि शक्ति महाशक्ति राजराजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी जी की आरती ॥ षोडशी स्वरूप स्तुति • श्रीविद्या महिमा • परम प्रेम एवं मंगल आरती 🪔 आरती ॥ ध्रुवपद ॥ जय त्रिपुर सुन्दरी माता, जय राजराजेश्वरी। जय आदि शक्ति जगदम्बे, जय महात्रिपुरेश्वरी॥ जय षोडशी कलाधारिणी, जय श्रीविद्या भवानी। तेरे चरणों में माँ बसती, जग की अमर निशानी॥ प्रथम स्तुति — आदि महाशक्ति ॥ आदि अनादि तू ही माता, तू ही सृष्टि की धारा। तुझसे ज्योति, तुझसे जीवन, तू ही जग का सहारा॥ ब्रह्मा-विष्णु-शिव के भीतर, तेरी शक्ति समाई। कण-कण में तेरा ही दर्शन, तू सबकी महताई॥ करुणा की तू दिव्य सरिता, प्रेम सुधा बरसाती। शरण पड़े जो तेरे द्वारे, ममता से अपनाती॥ नित्य, शुद्ध, बुद्ध, आनन्दमयी, जग की मूल भवानी। राजराजेश्वरी त्रिपुरे माता, तू ही महाकल्याणी॥ जय षोडशी, जय श्रीललिता, जय त्रिपुर सुन्दरी। जय आदि शक्ति महाशक्ति, जय राजराजेश्वरी॥ द्वितीय स्तुति — श्री षोडशी स्वरूप ॥ षोडश कला स्वरूप मनोहर, अरुण प्रभा सुखकारी। कोटि चन्द्र सम शीतल शोभा, कोटि सूर्यों सी उजियारी॥ सोलह कलियों-सी छवि तेरी, सोलह कला की प्यारी। पूर्ण चन्द्र-सी पूर्ण कला तू, त्रिभुवन की महतारी॥ पाश-अंकुश, पुष्पित धनुष धर, कर में बाण सुहाए। कमलासन पर विराजित माता, भक्त हृदय हर्षाए॥ ललित ललाम ललिता त्रिपुरे, नित्य नवेली रानी। बालारुण मुख, दिव्य मुस्कान, तू जग की कल्याणी॥ जय षोडशी राजराजेश्वरी, जय श्रीविद्या धाम। तेरी छवि पर वारूँ माता, तन-मन जीवन प्राण॥ ॥ तृतीय स्तुति — श्रीचक्र निवासिनी ॥ श्रीचक्र के महाबिन्दु में, तेरा दिव्य निवास। त्रिकोणों में शक्ति विराजे, तुझमें जग का प्रकाश॥ नवावरण की अधिष्ठात्री, योगिनियों की रानी। मन्त्र-तन्त्र की मूल महेशी, वेदों की कल्याणी॥ ऐंकारी तू ज्ञान प्रदायिनी, ह्रींकारी सुखधामा। श्रींकारी सम्पदा की दात्री, पूर्ण करे सब कामा॥ तेरे नाम की मधुर ध्वनि से, अन्तर्मन मुस्काए। मौन हृदय के निर्मल नभ में, तेरा रूप समाए॥ जय श्रीचक्र निवासिनी माता, जय मन्त्रेश्वरी। जय कामेश्वरी, जय ललिता, जय परमेश्वरी॥ ॥ चतुर्थ स्तुति — जगत् जननी करुणामयी रोग-शोक से व्याकुल मन को, धीरज देने वाली। दुःख में आशा, भय में साहस, माँ तू मंगलकारी॥ ज्वरघ्नी, महाव्याधिशमनी, प्राणदात्री माता। सर्वमृत्यु-प्रशमनी अम्बे, जग की भाग्यविधाता॥ दीन-दुखी के नयनों में तू, आशा दीप जलाए। बिछुड़े मन को प्रेम सिखाकर, सबको गले लगाए॥ तन को आरोग्य, मन को शान्ति, बुद्धि को उजियारा। सबके जीवन में भर दे माँ, प्रेम सुधा की धारा॥ जय करुणामयी महाशक्ति, जय आरोग्यदायिनी। जय त्रिपुर सुन्दरी माता, जय जगत् की स्वामिनी॥ चिदमृत-रस स्तुति ॥ नीलाम्बर की ओढ़नी ओढ़े, श्वेताम्बर की साड़ी। मंदार-सुमन-सी छवि मनोहर, मादकता सुखकारी॥ करुणा झलके नयन-कमल में, छवि अनुपम अति प्यारी। चिदमृत-रस का दिव्य सुधामय, प्रेम-पात्र कर धारी॥ ब्रह्मानन्द रस पान करति माँ, त्रिपुरा भव-भय-हारी। चेतन-ज्योति-सुधा में डूबी, जय माता त्रिपुरारी 🪔 समापन आरती आरती तेरी उतारूँ माता, प्रेम-दीप जलाकर। श्रद्धा के सुमनों से पूजूँ, शीश चरणों में झुकाकर॥ घट-घट में तेरा ही आसन, श्वास-श्वास में माया। तू ही साधक, तू ही साधना, तूने जग रचवाया॥ जो कुछ है, सब तेरा माता, तुझको अर्पण सारा। तेरी कृपा बनी रहे माँ, जीवन हो उजियारा॥ जय त्रिपुर सुन्दरी माता, जय राजराजेश्वरी। जय आदि शक्ति जगदम्बे, जय महात्रिपुरेश्वरी॥ जय षोडशी महाशक्ति, जय श्रीविद्या भवानी। जय ललिता परमेश्वरी, जय अम्बे कल्याणी॥ आदि अवधूत माँ स्तुति गायी, चरणों में धर शीश। त्रिपुर सुन्दरी कृपा करो, प्रेम बसे जगदीश॥ 🙏🌺 🙏 ॥ श्रीमात्रे नमः। श्रीललिताम्बिकायै नमः। ॥ ​#MaaTripuraSundari ​#TripurSundari ​#SriVidya ​#HinduDevotional ​#DivineAarti ​#BhaktiGeet ​#MataAarti ​#Sadhna