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स्वरचित कविता: हिन्दी की पुकार | Hindi Ki Pukar | Hindi Diwas Special Poem | Viswapati Singh

DHAMAL धमाल

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स्वरचित कविता: हिन्दी की पुकार | Hindi Ki Pukar | Hindi Diwas Special Poem | Viswapati Singh

49 просмотров · 5 дней назад
DHAMAL धमाल
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स्वरचित कविता: हिन्दी की पुकार | Hindi Ki Pukar | Hindi Diwas Special Poem | Viswapati Singh नमस्ते दोस्तों! हिन्दी दिवस के इस पावन अवसर पर प्रस्तुत है मेरी स्वरचित कविता "हिन्दी की पुकार"। यह कविता हिन्दी भाषा के गौरव, उसकी वर्तमान स्थिति और हमारे समाज से उसकी अपेक्षाओं को दर्शाती है। हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान की आत्मा है। अगर आपको यह कविता पसंद आए, तो कृपया इस वीडियो को लाइक करें, अपने विचारों को कमेंट में साझा करें और हिन्दी के सम्मान में इसे अपनों के साथ शेयर जरूर करें। channel को सब्सक्राइब करना न भूलें! कविता के बोल (Lyrics Snippet): हिन्दी आज खड़ी है द्वारे , आँखों में है नीर, अपने ही घर में पूछ रही है, क्यों बन गई मैं पीर जिस धरती ने जन्म दिया, जिस माटी ने पहचाना, उसी देश म अपनेपन का, क्यों न मिला ठिकाना कभी कबीर की वाणी बनकर, जन-जन तक मैं आई, तुलसी के चौपाई बनकर, भक्ति की ज्योती जगाई। सूरदास के भावों म बहकर प्रेम सुधा बरसाई, मीरा के पद में घुलकर मैंने , प्रभु से प्रीत निभाईं । #HindiDiwas #HindiKiPukar #HindiPoetry #SwarachitKavita #HindiDiwasSpecial #HindiBhasha #PoetryCommunity #HindiKavita #KaviSammelan #HindiLiterature