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“पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़,घर की चाकी कोई न पूजे, जेहि का पीस खाय।”👉🔴सदगुरु कबीर साहेब

संत श्री वैराग्य साहेब sant shri vairagya saheb

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“पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़,घर की चाकी कोई न पूजे, जेहि का पीस खाय।”👉🔴सदगुरु कबीर साहेब

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“पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़,घर की चाकी कोई न पूजे, जेहि का पीस खाय।”👉🔴सदगुरु कबीर साहेब