CASE STUDY OF MAHINDRA THAR @VHPankaj
VH Career Growth | Pankaj Singh
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विश्व युद्ध के लिए बनाई गई कार पर आया दुनिया का दिल, 80 साल पहले शुरू हुआ सफर, आज है देश की बेस्ट ऑफरोडर
आज जिस थार पर दुनिया का दिल आया है, उसे पहली बार सेना के लिए बनाया गया था. इसका जंग के मैदान में तोप और हथियार ले जाने के लिए इस्तेमाल करते थे. आज थार की डिमांड भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है.
Mahindra Thar: महिंद्रा थार वर्तमान में देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली ऑफरोडर SUV है. आज एसयूवी के लिए एक साल से ज्यादा वेटिंग रहती है. थार की डिमांड भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज जिस थार पर दुनिया का दिल आया है, उसे पहली बार सेना के लिए बनाया गया था. इसे ऐसे जंग के मैदान में तोप और हथियार ले जाने के लिए इस्तेमाल करते थे, जहां ट्रक तक नहीं पहुंच पाते थे. महिंद्रा थार का ये सफर काफी दिलचस्प है.
1939-1945 के बीच दूसरा विश्व युद्ध लड़ा गया. इसी दौरान महिंद्रा थार के अस्तित्व में आने की शुरुआत हुई. दरअसल, अमेरिका को जंग के मैदान में सस्ता, छोटा और मजबूत वाहन की जरूरत थी. इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका ने देश की सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों से सेना के लिए मॉडल तैयार करने के लिए कहा. अमेरिका ने इसके लिए सिर्फ 49 दिन का ही समय दिया. इतने कम वक्त में सिर्फ एक कंपनी वेंटम ही मॉडल तैयार कर पाई, लेकिन वेंटम उस वक्त बहुत छोटी कंपनी थी और सेना की मांग के हिसाब से प्रोडक्शन नहीं कर सकती थी. इसलिए अमेरिका ने दूसरी कंपनी विलिज ऑवरलैंड डिजाइन को वेंटम के डिजाइन के साथ वाहन तैयार करने का ऑर्डर दिया.
सेना के लिए बनाए गए थे 6 लाख मॉडल
विलिज ओवरलैंड ने जो वाहन तैयार किया उसका नाम JEEP रखा. यह किसी भी तरह के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकती थी. साथ ही यह इतनी मजबूत थी कि छोटे-मोटे बंदूक और धमाके के हमलों का भी इस पर कुछ असर नहीं होता था. इन्हीं सब खूबियों की वजह से जीप दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा बन गई. विलिज ने युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना के लिए करीब 6 लाख मॉडल तैयार किए. 1945 में युद्ध खत्म होने के बाद जीप की डिमांड पूरी तरह खत्म हो गई थी.
इस तरह हुई महिंद्रा एंड महिंद्रा की एंट्री
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विलिज ने घाटे से बचने के लिए जीप को बाजार में बेचना शुरू किया, लेकिन जैसी सफलता इसे युद्ध के मैदान में मिली, वैसी सफलता सड़कों पर नहीं मिल पाई. इसके बाद तो कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई. यही वो वक्त है, जब कहानी में महिंद्रा एंड महिंद्रा की एंट्री होती है. दरअसल, महिंद्रा के फाउंडर जेसी महिंद्रा और केसी महिंद्रा ने कुछ वक्त अमेरिका में बिताया था. इसी दौरान उन्होंने जीप को देखा. केसी महिंद्रा को ये मॉडल काफी पसंद आया. उन्होंने विलिज से जीप को इंडिया इंपोर्ट करने की डील की. इस तरह साल 1949 में महिंद्रा एंड महिंद्रा जीप को भारत लेकर आए.
This video is made for promoting the Indian manufacturing sector of vehicles demanding all over the world.
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