मां जगदंबा बूढ़ी के रूप में आती है बिहार के इस मंदिर में
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इच्छुक श्रद्धालु भव्य मंदिर निर्माण में सहयोग कर सकते हैं - खाता संख्या 3223451483 IFSC CBIN 0281983
पटना : राजधानी से बख्तियारपुर पथ में करौटा स्थित मां जगदंबा मंदिर की महिमा दूर तलक है। प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां दर्शन और पूजा-अर्चना करने जुटती है। लोगों का दावा है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई सभी मुरादें पूरी होती है। मां जगदंबा का चमत्कार अलौकिक है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि मां जगदंबे सूनी गोद को भरने के लिए विख्यात हैं। यहां आ कर मरणासन व्यक्ति भी जीवित हो जाता है।
मां जगदंबे स्थान का इतिहास अति प्राचीन है। मां जगदंबे का यह स्थान कितना प्राचीन है इसे आजतक कोई नहीं बता पाया। इस संबंध में लोगों के कई मत हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार 1193 ई में बख्तियार ख़िलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय पर आक्रमण किया था। तब, मंदिर को क्षतिग्रस्त कर प्रतिमा को खंडित करने का दुस्साहस किया था। पहले भी खिलजी द्वारा दो बार हमला किया गया था। लेकिन, 1193 का जो आक्रमण था वह विनाशकारी और भयावह था हमले में विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में रखी किताबे कई सप्ताह तक जलती रही थी। इसी के बाद 1199 में बिहार और बंगाल पर बख्तियार खिलजी कब्जा कर लिया था। जानकारी के मुताबिक मां जगदंबा का ऊपर और नीचे का भाग है लेकिन बीच का भाग गायब है।
इस तरह करौटा स्थित जगदंबा स्थान का इतिहास मुगल शासको से काफ़ी पहले का है। मां जगदंबा का भक्तों पर अपार कृपा बरसती है। दूर-दूर से लोग जगदंबा स्थान माता के मंदिर में शीश नवाने और मन्नते मांगने आते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक का कहना है कि निस्संतान दंपतियों पर माता का असीम कृपा बरसती है।
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111 फिट ऊंची भव्य गुंबज का हो रहा निर्माण
भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान मां जगदंबे स्थान पर स्थानीय समाजसेवी दिलीप सिंह द्वारा 111 फिट ऊंचे गुंबज का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जिसे अविलंब पूरा कर लिया जाएगा।उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कई किलोमीटर दूर से भी श्रद्धालु मां जगदंबे मंदिर का दर्शन कर सकेंगे। वहीं इससे मंदिर की भव्यता और बढ़ेगी।