Kuchh Log Umr Bhar Saath Hokar Bhi Apne Nahin Hote | Jagjit Singh Sad Ghazal
SuvYr II
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Kuchh Log Umr Bhar Saath Hokar Bhi Apne Nahin Hote | Jagjit Singh Sad Ghazal
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कुछ लोग उम्र भर साथ होकर भी अपने नहीं होते
कुछ लोग उम्र भर साथ होकर भी अपने नहीं होते,
कुछ रिश्ते पास रहकर भी कभी पूरे नहीं होते।
हमने हर बार उन्हें अपना समझकर दिल दिया,
मगर हर अपने, दिल के इतने करीब नहीं होते।
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रास्ते एक थे, मंज़िलें भी एक थीं कभी,
फिर जाने क्यों कदम हमारे एक नहीं होते।
हम इंतज़ार करते रहे उनकी एक आवाज़ का,
और वो थे कि कभी हमारे होकर नहीं होते।
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हमने हँसकर छुपा लिया हर दर्द अपना,
लोग समझते रहे कि हम कभी उदास नहीं होते।
किसे बताएं कि रातों में टूटते हैं हम,
हर आँसू आँखों से बाहर नहीं होते।
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कुछ ख़्वाब थे जिन्हें हमने उम्र दे दी,
कुछ ख़्वाब थे जो हमारे होकर भी नहीं होते।
ज़िंदगी ने बहुत कुछ सिखाया धीरे-धीरे,
हर सबक किताबों में लिखे नहीं होते।
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अब किसी से कोई शिकायत भी नहीं है,
शायद सभी रिश्ते हमेशा के लिए नहीं होते।
जो चला गया, उसे जाने दिया हमने,
हर बिछड़ने वाले बेवफ़ा नहीं होते।
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शायरी
कभी-कभी किसी को खोना,
किसी रिश्ते का अंत नहीं होता…
बस इतना होता है,
कि इंसान समझ जाता है—
हर अपना, हमेशा अपना नहीं होता।
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अब जो मिले हैं, उन्हें संभालकर रखते हैं,
हर रिश्ते को सवालों में नहीं तौलते हैं।
कौन कल तक साथ रहेगा, किसे मालूम,
हम अब आज को कल से नहीं जोड़ते हैं।
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कुछ लोग यादों में उम्र भर रह जाते हैं,
मगर ज़िंदगी में वापस नहीं आते हैं।
हम भी अब मुस्कुरा देते हैं उनका नाम सुनकर,
क्योंकि पुराने ज़ख़्म रोज़ नहीं सताते हैं।
कुछ लोग उम्र भर साथ होकर भी अपने नहीं होते,
कुछ रिश्ते पास रहकर भी कभी पूरे नहीं होते…