भोजपुरी की लोकोक्तियां: अनुभव से अभिव्यक्ति तक - डॉ. विभा शंकर
संवदिया
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भोजपुरी की लोकोक्तियां: अनुभव से अभिव्यक्ति तक - डॉ. विभा शंकर
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'मानस' पत्रिका चतुर्थ वार्षिकोत्सव-२०२६
भोजपुरी अध्ययन केंद्र और 'मानस' पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में 'हिंदी भाषा उत्सव' के अंतर्गत भोजपुरी अध्ययन केंद्र ,बीएचयू के राहुल सभागार में वैचारिक सङ्गोष्ठी सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस सङ्गोष्ठी का विषय था-'हिंदी का लोक और लोक की हिंदी'।
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूम में शामिल डॉ. विभा शंकर ने कहा कि हमारी लोकभाषा में प्रयुक्त होने वाली लोकोक्तियाँ हमारे समाज के निरंतर प्रवाहमान संस्कृति की वाहक होती हैं।समाज अपना सामूहिक अनुभव इन लोकोक्तियों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को हस्तांतरित करता है। लोकोक्तियाँ हर तरह भावों की अभिव्यक्ति को जीवंत बनाती हैं।