श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 | अर्जुन विषाद योग | श्लोक 1–47 | अर्जुन का गांडीव क्यों छूट गया?
jeevan sanjivani bhagwatgeeta
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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 | अर्जुन विषाद योग | श्लोक 1–47 | अर्जुन का गांडीव क्यों छूट गया?
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क्या हुआ था कुरुक्षेत्र की रणभूमि में, जब अपने ही गुरु, पितामह और प्रियजनों को सामने देखकर अर्जुन का गांडीव हाथ से छूट गया?
यह है श्रीमद्भगवद्गीता का प्रथम अध्याय — अर्जुन विषाद योग, संपूर्ण श्लोक 1 से 47 तक।
इस अध्याय में देखिए कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि का वह अद्भुत क्षण, जब धृतराष्ट्र युद्ध का समाचार जानना चाहते हैं, संजय उन्हें रणभूमि का दृश्य बताते हैं, दुर्योधन अपनी सेना के महान योद्धाओं का वर्णन करता है और अंततः अर्जुन दोनों सेनाओं के बीच अपने ही स्वजनों को देखकर गहरे मोह और विषाद में डूब जाते हैं।
अर्जुन का प्रश्न केवल युद्ध का प्रश्न नहीं था…
यह उस मनुष्य की दुविधा थी जो अपने कर्तव्य और अपने प्रियजनों के बीच खड़ा था।
और यहीं से शुरू होती है वह यात्रा जिसने पूरी मानवता को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान दिया।
🙏 पूरा अध्याय ध्यानपूर्वक सुनें और इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनें।
ॐ परमात्मने नमः
जीवन संजीवनी भगवद्गीता
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