तुलसी मानस मंदिर वाराणसी- यहाँ की थी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की रचना | 4K | दर्शन 🙏
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तुलसी मानस मंदिर वाराणसी- यहाँ की थी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस की रचना | 4K | दर्शन 🙏
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श्रेय:
संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल
लेखक - रमन द्विवेदी
भक्तों नमस्कार! प्रणाम! सादर नमन और अभिनन्दन....भक्तों बाबा विश्वनाथ की निवासस्थली वाराणसी एक अद्वितीय पौराणिक नगरी है। ये अपने अद्भुत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्वों के चलते समूचे विश्व की आस्था और आकर्षण का केंद्र हैं। वाराणसी में एक तरफ जहां गंगा जी एक से बढ़कर एक दर्जनों घाट हैं तो वहीं एक से बढ़कर एक सैकड़ों मंदिर भी हैं। यहाँ स्थित सभी मंदिरों की अपनी अपनी कथा और अपना अपना महत्व है। लेकिन वाराणसी में एक ऐसा मंदिर भी जिसमें रामायण का प्रत्येक प्रसंग जीवंत और गतिमान हैं। भक्तों हम बात कर रहे हैं तुलसी मानस मंदिर की....
तुलसी मानस मंदिर के बारे में:
भक्तों तुलसी मानस मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को ‘बिड़ला मानस मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर वाराणसी रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी और बी एच यू से 2 किमी दूर दुर्गा मंदिर के करीब दुर्गाकुंड में स्थित है। यह मंदिर पूर्णतः संत शिरोमणि महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी तथा उनके द्वारा रचित श्री रामचरितमानस को समर्पित है।गोस्वामी तुलसीदासजी ने महाकाव्य श्री रामचरितमानस की रचना इसी स्थान पर की थी। इसलिए इस मंदिर को तुलसी मानस मंदिर कहा जाता है। यह काशी में पर्यटकों और यात्रियों की आस्था और आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर का निर्माण:
भक्तों तुलसी मानस मन्दिर काशी के आधुनिक मंदिरों में एक बहुत ही मनोरम मन्दिर है। इस मन्दिर निर्माण कलकत्ता के एक व्यापारी सेठ रतन लाल सुरेका ने करवाया था। पूरी तरह संगमरमर से बने इस मंदिर का उद्घाटन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा सन॒ 1964 में किया गया।
मंदिर की कलाकृति:
भक्तों वाराणसी का तुलसी मानस मन्दिर एक भव्य दिव्य और विशाल मंदिर है इस मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता, भैया लक्ष्मण और भगवान् राम के अनन्य भक्त श्री हनुमानजी के अत्यंत मनमोहक और जीवंत विग्रह विराजमान हैं। इसके अलावा यहां एक तरफ माता अन्नपूर्णा और शिवजी तथा दूसरी तरफ भगवान सत्यनारायण का मंदिर भी है।
मंदिर की विशेषता:
भक्तों तुलसी मानस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मन्दिर के सम्पूर्ण दीवारों पर नक्काशी द्वारा, रामायण के हिंदी संस्करण श्री रामचरितमानस के श्लोकों, दोहा, सोरठा, चौपाइयों और दृश्यों को आकर्षक ढंग से उकेरा गया है अपितु अपितु चित्रों द्वारा रामायण के जटिल रहस्य और गूढ़ दर्शन को सरल शब्दों में वर्णित किया गया है.
स्वचालित लीलाएँ:
भक्तों तुलसी मानस मंदिर के दूसरी मंजिल पर संत तुलसीदासजी विराजमान है, साथ ही इसी मंजिल पर भगवान श्रीराम और भगवान श्री कृष्ण की विद्युत स्वचालित लीलाओं का दर्शन होता है। इन लीलाओं में रामायण और महाभारत में वर्णित विभिन्न प्रसंगों का मनमोहक दर्शन होता है. जो यहाँ आनेवाले यात्रियों और भक्तों को आनंदित करती है।
तुलसी उद्यान:
भक्तों वाराणसी के तुलसी मानस मंदिर प्रवेश द्वार के दाईं ओर एक आकर्षक तुलसी उद्यान है. जो बहुत ही शांत और स्वच्छ है। इस उद्यान में गोस्वामी तुलसीदास जी बहुत ही सुन्दर मूर्ति विराजमान है. जहाँ लिखा है “तुलसी दास चंदन घिसत, तिलक देत रघुवीर”।
तुलसी सरोवर:
भक्तों वाराणसी के तुलसी मानस मंदिर के प्रमुख भवन के बाईं ओर एक सुंदर सरोवर है जिसे तुलसी सरोवर के नाम से जाना जाता है। इस सरोवर में चार घाट बने हैं. इन घाटों चारों घाट श्री रामचरित मानस सरोवर के उत्तरी घाट में श्री काकभुशुंडि जी की मूर्ति है, दक्षिणी तट पर श्री याज्ञवल्कजी महाराज की मूर्ति है, पूर्वी घाट में श्री आशुतोष भगवान शिव की मूर्ति है और पश्चिमी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्ति है। मंदिर के केंद्र में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ राम दरबार है।
मंदिर का महत्व:
भक्तों वाराणसी के मंदिरों में तुलसी मानस मंदिर का विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। क्योंकि 16वीं शताब्दी में परम रामभक्त संत शिरोमणि महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने विश्व प्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस की रचना इसी स्थान पर की थी। लोगों का कहना है कि पहले यहां एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था। जिसे कलकत्ता के प्रसिद्ध व्यापारी सेठ रतनलाल सुरेका जी ने विस्तारित कर भव्यता प्रदान की।
आसपास के पर्यटन स्थल:
भक्तों अगर आप काशी तुलसी मानस मंदिर जाने का प्लान बना रहे है और दर्शन पूजन के अलावा पर्यटन में भी रुचि रखते हैं काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, दशाश्वमेध घाट, असीघाट, मणिकर्णिका घाट, दुर्गा कुंड मंदिर, चुनार का किला, रामनगर किला, सारनाथ, लोलार्क कुंड, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, जैन मंदिर, गोडोवालिया मार्केट, जंतर-मंतर, भारत माता मंदिर, संकट मोचन मंदिर, ललिता गौरी मंदिर, कालभैरव मंदिर, डंडी राज गणेश मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर, साक्षी गणेश मंदिर, विशालाक्षी माता मंदिर और गंगा जी के घाट अन्य लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है.
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव, तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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