WH-1402 गेहू की नई प्रजाति,(HAU) द्वारा विकसित की,सम्पूर्ण जानकारी ℹ️,किसान हरदा
कृषि किसान पुत्र आनंद गुर्जर
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WH-1402 गेहू की नई प्रजाति,(HAU) द्वारा विकसित की,सम्पूर्ण जानकारी ℹ️,किसान हरदा
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कृषि किसान पुत्र आनंद गुर्जर
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WH 1402 (डब्ल्यूएच 1402) चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार द्वारा विकसित गेहूँ की एक उन्नत और नवीनतम किस्म है, जो विशेष रूप से कम पानी (2-3 सिंचाई), रेतीली मिट्टी और कम उपजाऊ भूमि के लिए वरदान मानी जा रही है। यह किस्म 140-145 दिनों में तैयार होती है और 22-28 क्विंटल (50-68 मण) प्रति एकड़ तक की उच्च पैदावार दे सकती है।
WH 1402 गेहूँ किस्म की मुख्य विशेषताएं:
कम पानी व खाद: केवल दो से तीन पानी में तैयार होने वाली, कम उपजाऊ मिट्टी के लिए सर्वोत्तम।
पैदावार: उपयुक्त खेती पर 22 से 28 क्विंटल/एकड़ (50-68 मण) तक उपज मिल सकती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह किस्म पीला रतुआ (Yellow Rust) और भूरा रतुआ (Brown Rust) रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।
पौधे की संरचना: पौधों की ऊंचाई लगभग 100-105 सेमी होती है, जिससे यह गिरती नहीं है (lodging resistance)।
दाने की गुणवत्ता: दाना मोटा, चमकदार और लाल रंग का होता है, जिसमें 11.3% से अधिक प्रोटीन और आयरन-जिंक की अच्छी मात्रा होती है।
बुवाई का समय: अगेती बुवाई (25 अक्टूबर से 10 नवंबर) के लिए सबसे उपयुक्त।
उपयुक्त क्षेत्र: हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी यूपी, और कुछ हद तक हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के रेतीले क्षेत्रों के लिए अनुशंसित।
खेती के टिप्स:
बीज दर: 40 किलोग्राम प्रति एकड़।
सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद (जड़ों के विकास के समय) और दूसरी सिंचाई 80-85 दिन बाद (बालियां निकलते समय) करना सबसे महत्वपूर्ण है।
उर्वरक: 1 बैग DAP और 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ बुवाई के समय डालें।