Перейти к содержимому

“तू आना… मगर अपना अहंकार रास्ते में छोड़कर” | Hindi Poetry

Voice of the Heart - the strength of your soul

0:00 / 0:00

“तू आना… मगर अपना अहंकार रास्ते में छोड़कर” | Hindi Poetry

103 просмотра · 11 дней назад
Voice of the Heart - the strength of your soul
69 подписчиков
103 просмотра · 11 дней назад
कभी-कभी हम किसी चीज़ को पाने के लिए पूरी ज़िंदगी इंतज़ार करते हैं। हम उसके आने की राह देखते हैं, उसके लिए अपने सपनों को सजाते हैं… लेकिन क्या हो अगर उसे पाने की कीमत हमें खुद को खोकर चुकानी पड़े? क्या ऐसी ऊँचाई सच में ऊँचाई है, जहाँ पहुँचकर इंसान अपनी जड़ों से कट जाए? क्या ऐसी जीत सच में जीत है, जिसमें दुनिया से तो हम जीत जाएँ, लेकिन अपने भीतर के इंसान से हार जाएँ? यह कविता उसी सवाल की एक दिल से निकली हुई बातचीत है। एक ऐसी बातचीत, जिसमें चाहत भी है, इंतज़ार भी है… लेकिन एक शर्त भी है— *मुझे बड़ा बनाना, मगर इतना नहीं कि मैं इंसान ही न रहूँ।* सफलता ज़िंदगी का खूबसूरत हिस्सा हो सकती है, लेकिन अगर सफलता के साथ अहंकार आ जाए और इंसानियत पीछे छूट जाए, तो उस सफलता का अर्थ क्या रह जाता है? यह कविता उन सभी लोगों के लिए है जो अपने सपनों को पाना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं और जीवन में सफल होना चाहते हैं—लेकिन अपनी पहचान, अपने रिश्ते, अपनी जड़ें और अपनी इंसानियत खोकर नहीं। अगर आपको भी लगता है कि **सच्ची सफलता वही है जिसमें हम ऊपर उठें, लेकिन भीतर से छोटे न हों**, तो यह कविता शायद आपके दिल तक पहुँचे। अगर कविता आपको पसंद आए, तो इसे उन लोगों के साथ ज़रूर शेयर करें जो अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं। *Written and Narrated by Rina* *Voice of the Heart – The Strength of Your Soul* #HindiPoetry #HindiKavita #Success #LifePoetry #MotivationalPoetry #SuccessMotivation #LifeLessons #SelfWorth #Humanity #Ego #InspirationalPoetry #DeepPoetry #HeartTouchingPoetry #HindiMotivation #Zindagi #Safalta #सफलता #हिंदीकविता