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बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 27—भाव बल एवं भावेश का महत्त्व | House Strength & Its Lord Explained

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बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 27—भाव बल एवं भावेश का महत्त्व | House Strength & Its Lord Explained

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बृहत् पराशर होरा शास्त्र — अध्याय 27 भाव बल एवं भावेश का महत्त्व किसी भाव को देखकर उसका फल जान लेना क्या पर्याप्त है? महर्षि पराशर मैत्रेय को एक सुन्दर उपमा से समझाते हैं — भाव एक राज्य के समान है, और उसका स्वामी ग्रह (भावेश) उस राज्य के राजा के समान। राज्य चाहे कितना ही सुन्दर क्यों न हो, यदि राजा दुर्बल हो, तो समृद्धि पर प्रभाव अवश्य पड़ता है। जानिए भाव बल के चार स्रोत, भावेश की स्थिति जाँचने के चार प्रश्न, और सप्तम व दशम भाव के दो सजीव उदाहरणों से यह सिद्धांत व्यवहार में कैसे कार्य करता है। ⏱️ अध्याय के प्रमुख भाग (Timestamps): 00:00 परिचय 00:53 भाव बल के चार स्रोत 01:52 भावेश-बल का महत्त्व (राजा-राज्य उपमा) 02:48 भावेश की स्थिति जांचने के चार प्रश्न 04:26 उदाहरण — सप्तम भाव (विवाह) 05:45 भाव-भावेश परस्पर दृष्टि 07:11 उदाहरण — दशम भाव (कर्म) 08:33 संश्लेषण एवं समापन 🕉️ यह मूल, स्वरचित कथा-वाचन है — महर्षि पराशर एवं उनके शिष्य मैत्रेय के संवाद के रूप में — बृहत् पराशर होरा शास्त्र के पारम्परिक विषयों पर आधारित। 📖 अगला अध्याय (28): षड्वर्ग एवं सप्तवर्ग का परिचय — वर्ग-चार्टों के उस समूह का विस्तृत अध्ययन। 🔔 पूरी शृंखला के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन बेल दबाएँ। 🌐 अधिक जानकारी एवं दैनिक पंचांग के लिए देखें: astrojyotisha.com #होराशास्त्र #ज्योतिष #भावबल #भावेश #वैदिकज्योतिष #BrihatParasharaHoraShastra #AstroJyotisha #VedicAstrology #JyotishBasics