गीता का दिल कहाँ है? 7वें अध्याय का चमत्कार जिसने सांप को भी मुक्त कर दिया
Bholenath ki diwani
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गीता का दिल कहाँ है? 7वें अध्याय का चमत्कार जिसने सांप को भी मुक्त कर दिया
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क्या आप जानते हैं श्रीमद्भगवद्गीता का दिल कहाँ है? और 7वें अध्याय में ऐसी क्या शक्ति है जो एक ब्राह्मण को सर्प योनि से मुक्त कर देती है?
इस वीडियो में आप जानेंगे:
✅ गीता के 18 अध्यायों में दिल, मस्तक और चरण कौन से हैं?
✅ 7वें अध्याय - ज्ञान विज्ञान योग का 5 रहस्यों में पूरा सार
✅ भगवान की अपरा और परा प्रकृति क्या है?
✅ 4 प्रकार के भक्तों में भगवान को सबसे प्रिय कौन है?
✅ पद्म पुराण की सच्ची कथा - शंकुकर्ण ब्राह्मण कैसे धन के मोह में नाग बन गया और 7वें अध्याय के पाठ से कैसे मुक्त हुआ?
यह कथा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई है, जो पद्म पुराण के गीता माहात्म्य में वर्णित है।
यदि आप भी जीवन में मोह, लोभ और बंधन से मुक्त होना चाहते हैं तो गीता के 7वें अध्याय का श्रवण अवश्य करें।
🙏 कमेंट में जय श्री कृष्ण लिखना न भूलें।
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अध्याय 7 के मुख्य श्लोक:
मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः।
मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय।
बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वमिति।