Перейти к содержимому

Gave up engineering carreer and started dairy farming (इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ बने पशुपालक)

Bihar Agricultural University Sabour

0:00 / 0:00

Gave up engineering carreer and started dairy farming (इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ बने पशुपालक)

131 733 просмотра · 8 лет назад
Bihar Agricultural University Sabour
451 тыс. подписчиков
131 733 просмотра · 8 лет назад
मृत्युंजय ने वर्ष 2016 में निजी कम्पनी की 6 लाख रू0 की वार्षिक वेतन को त्याग कर पशुपालन, मछलीपालन एवं बागवानी को अपनी भावी जिन्दगी का आधार बनाया, नौकरी छोड़कर बड़ा रिस्क तो ले लिया लेकिन अब चुनौती थी तो अपने निर्णय को सही साबित करने की.. उन्हें पता चला कि अगवानपुर में कोई कृषि विज्ञान केंद्र हैण्ण्ण् इससे पहले इन्हें के० वी० के० के बारे में ज्यादा पता नहीं था.. २०१६ में उत्सुकता पूर्वक वे एक दिन जा पहुचे कृषि विज्ञानं केंद्र बाढ़ण्ण्ण्ण् मृत्युंजय को कृषि विज्ञानं केंद्र से उम्मीद से कहीं अधिक सहायता मिली.. वैज्ञानिकों से मिलकर जब मृत्युंजय को भरोसा हो गया तो उन्होंने अपने नए सपने को साकार करना शुरू कर दिया. वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में कुछ विदेशी नस्ल की गाय ख़रीदा साथ 10 यूनिट केंचुआ खाद उत्पादन हेतु तैयार किया। 3 बीघा में तालाब खुदवाया 13 बीघे में आम में विभिन्न प्रभेदों को लगाया इस प्रकार से उन्होंने एक दृ एक कर अपने सपने को जमीन पर उतार लिया और एक सुव्यवस्थित उद्यम को स्थापित किया। आज मृत्युंजय के पास १०विदेशी नस्ल के गाय है और १० बछिया है.. अब बे लगभग 80 लीटर दूध की बिक्री हर रोज कर रहे है और इससे लगभग उन्हें सलाना ६ से 7 लाख की आमदनी हो रही हैै। गोबर का उपयोग केंचुआ खाद उत्पादन में कर लगभग 1 से 2 लाख की आमदनी प्राप्त कर रहे है। साथ ही साथ 3 बीघे के तालाब से मछली कर 4 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा वे हाल में ही मशरूम का प्रशिक्षण भी कृषि विज्ञानं केंद्र से लिया और इसे भी उद्यम के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके अलावा मृत्युंजय जल्द ही मुर्गी एवं बकरी पालन को अपने उद्यम में साथ जोड़ने की योजना बना रहे हैं..