गुरु को मनाने की ऐसी दास्तान कहीं नहीं मिलेगी | Baba Bulleh Shah History in Hindi
jeene ki raah जीने की राह
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गुरु को मनाने की ऐसी दास्तान कहीं नहीं मिलेगी | Baba Bulleh Shah History in Hindi
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एक सच्चे मुरीद (शिष्य) और गुरु के बीच का रिश्ता दुनिया के हर रिश्ते से बढ़कर होता है। आज के इस वीडियो में हम बात करने जा रहे हैं महान सूफी संत बाबा बुल्ले शाह और उनके गुरु शाह इनायत के उस ऐतिहासिक प्रसंग की, जब गुरु उनसे रूठ गए थे।
समाज और जात-पात के बंधनों को दरकिनार कर, अपने 'मुर्शिद' को मनाने के लिए बुल्ले शाह ने जो रास्ता चुना, उसने इतिहास रच दिया। जानिए कैसे एक शिष्य ने अपने अहंकार को मिटाकर और घुंघरू बांधकर अपने रूठे हुए गुरु को मनाया।
वीडियो को अंत तक जरूर देखें, यह कहानी आपको अंदर से झकझोर कर रख देगी!
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