ढोला-मारू | राजस्थान की सबसे अमर गाथा | क्या हुआ था उनके साथ | जो आज भी देखने को मिलता | AKD CULTURE
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ढोला-मारू | राजस्थान की सबसे अमर गाथा | क्या हुआ था उनके साथ | जो आज भी देखने को मिलता | AKD CULTURE
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ढोला-मारू की कहानी
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बहुत समय पहले राजस्थान में नरवर के राजकुमार ढोला और पूगल की राजकुमारी मारू की कथा प्रसिद्ध थी। दोनों का विवाह बचपन में ही तय हो गया था, लेकिन बड़े होने पर वे अलग-अलग जगह रहने लगे और एक-दूसरे से दूर हो गए।
समय बीतने पर ढोला बड़ा हुआ और उसे अपने बचपन के विवाह की बात ठीक से याद नहीं रही। दूसरी ओर, मारू अपने पति ढोला की प्रतीक्षा करती रही। जब मारू को पता चला कि ढोला किसी दूसरी स्त्री के साथ रहने लगा है, तो उसने ढोला तक अपना संदेश पहुँचाने की कोशिश की।
कई प्रयासों के बाद मारू का संदेश ढोला तक पहुँचा। ढोला को अपना बचपन का विवाह याद आया और वह मारू से मिलने के लिए पूगल की ओर चल पड़ा।
दोनों की मुलाकात हुई और उन्होंने साथ रहने का निर्णय लिया। लेकिन रास्ते में कई कठिनाइयाँ आईं। लोककथा के अलग-अलग रूपों में उमर-सूमरा और अन्य विरोधियों द्वारा उन्हें रोकने की कोशिश का वर्णन मिलता है।
ढोला और मारू ऊँट पर बैठकर अपने घर की ओर लौट रहे थे। रास्ते में एक साँप ने मारू को डस लिया और वह बेहोश हो गई। ढोला बहुत दुखी हुआ। लोककथा के एक प्रसिद्ध रूप में गोरखनाथ/सिद्ध पुरुष की कृपा से मारू को फिर जीवन मिलता है।
अंततः ढोला और मारू सभी कठिनाइयों को पार करके अपने राज्य लौट जाते हैं और खुशी से साथ रहने लगते हैं।
ढोला-मारू की कथा राजस्थान के प्रेम, विरह, लोकगीत और ऊँट-यात्रा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथाओं में से एक है। इसके कई लोक-रूप हैं, इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में कहानी के पात्रों और घटनाओं में थोड़ा अंतर मिलता है।
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