Maa Brahmacharini Vandana | Second Navratri Mata Bhajan | Jai Maa Brahmacharini | Ghanikhama
Ghanikhama
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Maa Brahmacharini Vandana | Second Navratri Mata Bhajan | Jai Maa Brahmacharini | Ghanikhama
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Ghanikhama
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माँ... ओ माँ...
तेरी तपस्या की ज्योति जले,
मेरे मन का अँधियारा टले...
दूसरी ज्योत जली है आज,
माँ ब्रह्मचारिणी आई।
हाथ में माला, कमंडल लेकर,
भक्ति की राह दिखाई।
जय माँ ब्रह्मचारिणी...
जय माँ भवानी...
नंगे पाँव तू चली माँ,
कठिन तपस्या की राह।
धूप जली, मौसम बदले,
फिर भी ना छोड़ी चाह।
काँटों में भी फूल खिले माँ,
तेरे धैर्य के नाम।
मन में केवल शिव का ध्यान था,
होठों पर भगवान।
ना सोने का सिंहासन माँगा,
ना माँगा संसार।
सच्ची भक्ति, अटल संकल्प,
बना तेरा श्रृंगार।
माँ, ऐसा धैर्य दे मुझको,
मुश्किल में ना हारूँ।
तेरे जैसे सच्चे मन से,
हर दिन तुझको पुकारूँ।
ब्रह्मचारिणी माँ, ज्योत जला दे,
मेरे मन में भक्ति भर दे।
डगमग डगमग चलता जीवन,
माँ, तू मेरी राह सँवार दे।
ब्रह्मचारिणी माँ, हाथ पकड़ ले,
हर मुश्किल से पार लगा दे।
दूसरी रात तेरे नाम की माँ,
दिल में अपना दीप जला दे।
जय माँ ब्रह्मचारिणी!
जय माँ ब्रह्मचारिणी!
कठिन दिनों में तू ना टूटी,
ना बदला तेरा ध्यान।
सालों तक तू साधना करती,
मन में शिव का नाम।
पत्ते खाकर दिन बिताए,
फिर पत्ते भी छोड़ दिए।
संकल्प तेरे अटल रहे माँ,
अपने प्राण तप में जोड़ दिए।
तेरी तपस्या देखकर माँ,
देवों ने भी शीश झुकाया।
तेरी भक्ति की शक्ति ने,
शिव को भी पास बुलाया।
धीरे-धीरे मंजीरा बाजे,
ढोलक दे मधुर पुकार।
बोलो ब्रह्मचारिणी माता की—
जय! जय! जय!
बोलो अम्बे माता की—
जय! जय! जय!
जब मेरे जीवन में माँ,
मुश्किलों के बादल आएँ।
जब अपने भी दूर हो जाएँ,
जब आँसू आँखों में आएँ।
तब तेरी तपस्या याद करूँ माँ,
धैर्य अपने मन में धरूँ।
गिर जाऊँ तो फिर उठ जाऊँ,
तेरा नाम लेकर चलूँ।