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KAB BARSENGE MEGH MEHAR KE ( कब बरसेगें मेघ मेहर के ) NEW BHAJAN BY SWAMI BHAGAT PRAKASH JI MAHARAJ

Amrapur Darbar

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KAB BARSENGE MEGH MEHAR KE ( कब बरसेगें मेघ मेहर के ) NEW BHAJAN BY SWAMI BHAGAT PRAKASH JI MAHARAJ

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Amrapur Darbar
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कब बरसेंगे मेघ महर के सुमरन हमने बहुत किया क्यों न हुई है कृपा अब तक क्यों न प्रभू ने दरस दिया ।। - १. नहीं पूछा शबरी ने गुरु से - सफला कब जीवन होगा । साल महीना दिवस बता दो - कब रघुवर दर्शन होगा । राह देखते जीवन बीता तब रघुवर का दरस हुआ ।। - २. जब तक लौट न आएं बेटा - मरा मरा जपते रहना । लौट के तुम कब गुरु आओगे- कब तक नाम हमें रटना। बाल्मीक ने कभी न पूछा - नाम जपन में मगन भया । । 64 000 ३. ए बी सी डी क ख ग घ जल्दी से न समझ आए । शनैः शनैः अभ्यास करन से बालक पंडित बन जाए। तैसे अविरल जप करने से -उर में जगता ज्ञान दिया ।। ४. बन्द पड़ा जो घर बरसों से जल्दी साफ नहीं होता । अति मलीन वस्तर साबुन से - बार बार धोबी धोता । जल की बूंद बूंद गिरने से - पत्थर पर पड़े निशां । ५. आधी अधूरी करके साधना जल्दी से दर्शन चाहे । देवदूत कोई नभ से उतरे - स्वर्ग में हमको ले जाए । मंजिल दूर है राह कठिन है -जल्दी में कुछ भी न मिला।। ६. जनम जनम मुनि यतन कराहीं - अंत राम कह आवत नाहीं । तब बरसेंगे मेघ मेहर के तब रीझेंगे श्याम पिया । शरणागत हो व्याकुल मन से - जब तुमने हरि नाम लिया ।। ७. गुरु उपदिष्ट विधी से साधन में जो साधक लग जाए । समय लगे कितना ही लेकिन मंजिल वो निश्चित पाए । । धीरज धर जो चले निरन्तर उसने पाया प्रभू पिया ।