गंडक बैराज का 60 साल पुराना इतिहास | नेहरू और नेपाल के राजा महेंद्र ने रखा था शिलान्यास | VTR
🦸♀️नितंजय Kumar
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गंडक बैराज का 60 साल पुराना इतिहास | नेहरू और नेपाल के राजा महेंद्र ने रखा था शिलान्यास | VTR
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वाल्मीकिनगर का गंडक बैराज सिर्फ एक बांध या पुल नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के रिश्तों, इंजीनियरिंग और गंडक नदी से जुड़ी एक ऐतिहासिक कहानी है।
इस वीडियो में जानिए 1959 के भारत-नेपाल गंडक समझौते से लेकर 1964 के शिलान्यास और 1969 में बैराज के निर्माण तक की पूरी कहानी।
4 मई 1964 को तत्कालीन भैंसालोटन (वर्तमान वाल्मीकिनगर) में भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेपाल के राजा महेंद्र वीर विक्रम शाह देव की मौजूदगी में गंडक परियोजना के शिलान्यास का ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ था।
इस वीडियो में हम जानेंगे कि गंडक बैराज क्यों बनाया गया, इसके 36 गेट क्यों महत्वपूर्ण हैं, भारत और नेपाल के बीच हुए समझौते में क्या तय हुआ और इस परियोजना ने बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की सिंचाई व्यवस्था को कैसे प्रभावित किया।
साथ ही जानिए गंडक/नारायणी नदी, वाल्मीकिनगर, त्रिवेणी संगम और रामनगर के नर्मदेश्वर महादेव से जुड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक कड़ी।
📍 स्थान: वाल्मीकिनगर, पश्चिमी चंपारण, बिहार
🌊 नदी: गंडक / नारायणी
🇮🇳🇳🇵 भारत–नेपाल संयुक्त परियोजना
📜 समझौता: 1959
🏗️ शिलान्यास: 4 मई 1964
🏗️ निर्माण: 1960 के दशक
🚧 बैराज पूर्ण: 1968–69
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