Ghulam Ali-Gham Nahin Ji Tan Se Nikala Dil Gaya [From Mehfil e Mousiqii Programme Early 80s]
saurav suman
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Ghulam Ali-Gham Nahin Ji Tan Se Nikala Dil Gaya [From Mehfil e Mousiqii Programme Early 80s]
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saurav suman
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ग़म नहीं जी तन से निकला दिल गया
मिल गए तुम मुझ को सब कुछ मिल गया
बोले वो सीने पे मेरे रख के हाथ
कहिए अब तो इज़्तिराब-ए-दिल गया
ऐ निगाह-ए-यास तेरा हो बुरा
घर तलक रोता हुआ क़ातिल गया
तेग़-ए-क़ातिल है उसे बाद-ए-बहार
जब चली वो ग़ुंचा-ए-दिल खिल गया
कूचा-ए-गेसू न हाथ आया मुझे
काले कोसों सैकड़ों मंज़िल गया
मिट गया काजल का तिल इस्लाह में
मुसहफ़-ए-आ'रिज़ का नुक़्ता छिल गया
आहनी दम पर जहाँ बिगड़े हुज़ूर
लब हिलाए आप ने दिल हिल गया
मरहले तय कुंज-ए-उ'ज़्लत में किए
बैठे बैठे सैंकड़ों मंज़िल गया
बरहमन को बुत मुझे तू ऐ सनम
जिस ने जो माँगा ख़ुदा से मिल गया
जम्अ' हैं सीने में पैकाँ तीर के
सैंकड़ों दिल हैं अगर इक दिल गया
हल मिरे मुश्किल-कुशा ने की 'अमीर'
ले के कैसी ही कोई मुश्किल गया
AMEER MINAI