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बस शिव को चाहती पार्वती ❤️ | भोलेनाथ का प्रेम | माता पार्वती का शिव भजन | Mahadev Bhajan 2026

Neha Sagar official

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बस शिव को चाहती पार्वती ❤️ | भोलेनाथ का प्रेम | माता पार्वती का शिव भजन | Mahadev Bhajan 2026

77 просмотров · 7 дней назад
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माता पार्वती का अटूट प्रेम और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति को समर्पित यह सुंदर भक्तिमय गीत। 🙏🔱 सप्तऋषियों के प्रश्नों के बीच माता पार्वती का दृढ़ संकल्प — “अब तो मैं बस शिव की हो गई, शिव ही मेरे प्राण” ❤️ यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य प्रेम, तपस्या और समर्पण की भावना को दर्शाता है। 🔱 हर हर महादेव 🔱 🌺 जय माता पार्वती 🌺 🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏 अगर आपको यह शिव भजन पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔱 | Subscribe ❤️ जरूर करें। Song: बस शिव को चाहती पार्वती Singer: Neha Sagar Lyrics: Ronit Sagar & Neha Sagar Music: Ronit Sagar Presented By: Ronit Sagar official हर हर महादेव 🔱 ॐ नमः शिवाय 🙏    / @nehasagar0   🔥 Hashtags #Mahadev #ShivBhajan #Bholenath #Parvati #MataParvati #ShivShambhu #Mahakal #HarHarMahadev #OmNamahShivay #ShivParvati #MahadevBhajan #ParvatiSong #ShivSong #DevotionalSong #BhaktiSong #HindiBhajan #ShivBhakti #SanatanDharma #MahakalBhajan #Bhajan2026 Lyrics शिव शंभू को चाहती पार्वती, पार्वती, पार्वती समझाएँगे क्या सप्तऋषि, सप्तऋषि, सप्तऋषि तप मैं कर रही, शिव पर मर रही तप मैं कर रही, शिव पर मर रही मरना हो हर बार जब शिव को अपना मान लिया तो रहना उनके साथ अब तो मैं बस शिव की हो गई, शिव ही मेरे प्राण भोलेनाथ भोलेनाथ मेरे शंभू जैसा कोई नहीं, कोई नहीं, कोई नहीं देवों के भी देव यही, देव यही, देव यही वो हैं शंकर, वो हैं भयंकर वो हैं शंकर, वो हैं भयंकर, उन्हें कहते महाकाल बस महाकाल मुझे मिल जाएँ, सब छोड़ दूँ मैं घर-बार अब तो मैं बस शिव की हो गई, शिव ही मेरे प्राण भोलेनाथ भोलेनाथ मेरे शिव शंभू का क्या कहना, क्या कहना, क्या कहना मुझे और कहीं अब ना रहना, ना रहना, ना रहना दर्शन पाकर, कैलाश में आकर दर्शन पाकर, कैलाश में आकर मुझे मिल जाए संसार जब सच्चे मन से प्यार किया, कैसे कर दूँ इनकार अब तो बस मेरे दिल से निकले, बस मेरे भोलेनाथ भोलेनाथ बस शिव को चाहती पार्वती, पार्वती, पार्वती समझाएँगे क्या सप्तऋषि, सप्तऋषि, सप्तऋषि तप मैं कर रही, शिव पर मर रही तप मैं कर रही, शिव पर मर रही बस मेरे हैं महाकाल, शिव के प्रेम पाने को चाहे मरना हो हर बार अब तो मैं बस शिव की हो गई, शिव ही मेरे प्राण भोलेनाथ भोलेनाथ