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ईसा मसीह के द्रष्टांत। संत मत्ती रचित सुसमाचार से। EP 06 निर्दयी सेवक का द्रष्टांत

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ईसा मसीह के द्रष्टांत। संत मत्ती रचित सुसमाचार से। EP 06 निर्दयी सेवक का द्रष्टांत

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संत मत्ती के सुसमाचार में दिया गया निर्दयी सेवक का द्रष्टांत (The Parable of the Unmerciful Servant) क्षमा और दया के महत्व को सिखाता है। यह द्रष्टांत तब सामने आता है जब संत पतरस यीशु (ईसा मसीह) से पूछते हैं कि उन्हें अपने भाई को कितनी बार क्षमा करना चाहिए। असीमित क्षमा: यीशु ने सिखाया कि हमें दूसरों को केवल सात बार नहीं, बल्कि सत्तर बार सात बार (यानी हमेशा) क्षमा करना चाहिए।ईश्वरीय दया बनाम मानव व्यवहार: ईश्वर ने हमारे बड़े से बड़े पापों (दस हज़ार तोड़े के समान) को माफ कर दिया है। इसलिए, यह हमारा कर्तव्य है कि हम दूसरों की छोटी-मोटी गलतियों (सौ दीनार के समान) को माफ करें।न्याय का नियम: यदि हम दूसरों को दिल से क्षमा नहीं करते हैं, तो स्वर्ग का पिता भी हमें क्षमा नहीं करेगा।