अष्टावक्र गीता Episode 7 | जब मैं कर्ता ही नहीं… तो फिर कर्म किसका? | कर्तापन का रहस्य
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अष्टावक्र गीता Episode 7 | जब मैं कर्ता ही नहीं… तो फिर कर्म किसका? | कर्तापन का रहस्य
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क्या सच में हम अपने कर्मों के कर्ता हैं?
हम कहते हैं—
“मैंने यह किया।”
“मैंने सफलता पाई।”
“मैं असफल हो गया।”
“मैंने किसी की मदद की।”
“मैंने गलती की।”
लेकिन अष्टावक्र गीता एक बहुत गहरा प्रश्न सामने रखती है—
*“यह ‘मैं’ कौन है जो कहता है—मैंने किया?”*
इस Episode में हम समझेंगे कि कर्तापन की भावना कैसे जन्म लेती है और कैसे यही भावना मनुष्य को कर्म, फल, सफलता, असफलता, प्रशंसा और भय के बंधन में बाँध देती है।
इस Episode में जानिए—
🔸 क्या शरीर वास्तव में कर्ता है?
🔸 विचार और भावनाएँ अपने आप उठती हैं या हम उन्हें बनाते हैं?
🔸 “मैं कर्ता हूँ” की भावना कहाँ से आती है?
🔸 कर्म और कर्म के फल के बीच हमारा अहंकार कैसे जुड़ता है?
🔸 राजा जनक संसार में रहकर भी कर्म के बंधन से मुक्त कैसे रह सकते थे?
🔸 “मैं राजा हूँ” और “राजा होना मेरी भूमिका है” में क्या अंतर है?
🔸 सुख-दुःख का भोगता कौन है?
🔸 सफलता और असफलता को अपनी पहचान बनाने से बंधन क्यों पैदा होता है?
🔸 वैराग्य का वास्तविक अर्थ क्या है?
🔸 क्या आत्मज्ञान का अर्थ कर्म छोड़ देना है?
अष्टावक्र की दृष्टि हमें कर्म से भागना नहीं सिखाती।
बल्कि यह देखने के लिए कहती है—
**कर्म हो सकता है…
लेकिन कर्म का अहंकार आवश्यक नहीं।**
आप अपना कर्तव्य निभा सकते हैं।
सफल हो सकते हैं।
असफल हो सकते हैं।
दूसरों की सहायता कर सकते हैं।
लेकिन भीतर यह पकड़ आवश्यक नहीं कि—
*“मैं ही सब कुछ कर रहा हूँ।”*
क्योंकि जैसे ही “मैंने किया” की भावना मजबूत होती है, वैसे ही “मेरा” और “मुझे फल चाहिए” की कहानी शुरू हो जाती है।
और वहीं से—
भय आता है।
चिंता आती है।
अहंकार आता है।
आसक्ति आती है।
लेकिन जब पहचान बदलती है, तब धीरे-धीरे एक नई समझ जन्म लेती है—
*“मैं कर्मों को जानने वाली चेतना हूँ।”*
विचार आते हैं और चले जाते हैं।
भावनाएँ आती हैं और चली जाती हैं।
सफलता आती है और चली जाती है।
असफलता आती है और चली जाती है।
लेकिन जो इन सबको जान रहा है—
वह कौन है?
यही प्रश्न हमें आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।
**“मैं वह नहीं हूँ जो बदल रहा है।
मैं वह हूँ जिसमें परिवर्तन दिखाई दे रहा है।”**
🙏 यदि Episode 7 ने आपके भीतर कोई गहरा प्रश्न जगाया हो, तो वीडियो को Like करें, Share करें और *Tridev Creator* को Subscribe करें।
अगले Episode में हम जानेंगे—
*“जब ज्ञान हो गया, तो जीवन कैसे जिया जाए?”*
और देखेंगे कि आत्मज्ञानी व्यक्ति संसार में रहते हुए भी भीतर से मुक्त कैसे रह सकता है।
ॐ तत्सत्। 🙏
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