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धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishtha Nakshtra) अपराजेय, सर्वाधिक विध्वंसकारी सेनापति मंगल को उच्च बनाने वाला

ज्योतिष मञ्जरी *नक्षत्र वाणी* आचार्य देव

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धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishtha Nakshtra) अपराजेय, सर्वाधिक विध्वंसकारी सेनापति मंगल को उच्च बनाने वाला

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ज्योतिष मञ्जरी *नक्षत्र वाणी* आचार्य देव
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इस वीडियो में धनिष्ठा नक्षत्र के बारेमें जानकारी दी गयी है। कालपुरुष के कुंडली में दसम भाव और एकादस भाव दोनों में इसका गोचर है। यानि आप काम करेंगे तोह आपको पैसा भी मिलेगा और इन पैसे पर भी आपका अधिकार रहेगा, इसलिए इसका नाम है धनिष्ठा - धन से बहोत है। इसका स्वामी मंगल ग्रह है और मंगल भूमिपुत्र है, सेनापति है। इसके देवता है वो अष्टबासु है। इसके चरण मकर और कुम्भ में चलेंगे ऐसा ये नक्षत्र है। ये नक्षत्र में कैसा होगा आपका भाग्योदय, नौकरी व्यवसाय क्या करेंगे, कैसी होगी आपको सेहत और धनिष्ठा नक्षत्र अपराजेय वा सर्वाधिक विध्वंस कारी सेनापति मंगल को उच्च बनाने वाला क्यों कहा गया है ? इन सब बातोंका उत्तर आपको इस वीडियो में मिलेगा। ये वीडियो कृपया अंत तक देखिये। आकाश मंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा 23वें स्थान पर आता है। यह नक्षत्र चार तारों से मिलकर बना हुआ है। इसकी आकृति मंडल, मुरज या मृदंग के समान दिखाई देती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल हैं और देवता वसु हैं।