ODISSI CLASSICAL DANCE FESTIVALBYJOGAMAYA SAMAL & HER DISCIPLES #KUTAPO गुरु वंदना
Nafe Singh
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ODISSI CLASSICAL DANCE FESTIVALBYJOGAMAYA SAMAL & HER DISCIPLES #KUTAPO गुरु वंदना
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Nafe Singh
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ODISSI CLASSICAL DANCE FESTIVALBYJOGAMAYA SAMAL & HER DISCIPLES #KUTAPO
The main purpose of this performance is a Guru Vandana (offering obeisance and gratitude to the Guru).
Spiritual Devotion: The dance serves as a form of worship, expressing respect and devotion toward the teacher (Guru). The lyrics and chants emphasize seeking refuge in the teacher's guidance to remove ignorance and gain self-knowledge (1:27-2:44).
Cultural Preservation: By performing traditional Odissi dance, the performers, led by Jogamaya Samal and her disciples, uphold the authentic techniques, postures, and gestures of this classical art form.
Artistic Expression: Through movements and rhythmic patterns, the dance communicates deep philosophical themes regarding the student-teacher relationship and the pursuit of truth.
The Odissi classical dance performance concludes with a peaceful and spiritual ending. The final moments of the video feature the rhythmic chanting of "Om" followed by the repeated recitation of "Shanti" (peace) (16:49-17:14), bringing the performance to a serene close.
The opening act of the festival is performed by little kids (referred to as "little angels" in the introduction), who begin the event with a welcoming performance titled Swagatam (0:13-0:28).
गुरु वंदना (गुरुदेव! तुम्हें नमस्कार)
गुरुदेव ! तुम्हे नमस्कार बार-बार हैं,श्रीचरण शरण से हुआ, जीवन सुधार हैं ॥अज्ञान-तम हटाके ज्ञान-ज्योति जगा दी,दृढ़ आत्मज्ञान में अखण्ड दृष्टी लगा दी,उपदेश सदाचार सकल शास्त्र सार हैं ॥गुरुदेव ! तुम्हे नमस्कार बार-बार हैं ॥माधुर्य से मिटा रही मन का विकार हैं,यह है मनोरथ नित्य रहे संत चरण में,अन्तिम समय समाधि मरण चार शरण में,यह 'सुर्यचन्द्र' मोक्ष मार्ग में विहार हैं ॥
गुरु महिमा के कुछ सरल छंदआप इसे प्रार्थना या स्कूलों में विशेष अवसरों पर भी उपयोग कर सकते हैं:गुरु के चरणों में है वंदन, गुरु को करूँ मैं प्रथम प्रणाम,गुरु से ही शिक्षा मिलती है, गुरु से मिले अपरिमित ज्ञान।गुरु ही जीवन की धारा को, नई दिशा दिखलाता है,कठिन, कंटीले, वक्र मार्ग से, सरल राह ले जाता है।
असम का सबसे प्रसिद्ध नृत्य बिहू नृत्य (Bihu Dance) है। बिहू गीत (Bihu Geet) इसके साथ गाए जाने वाले मुख्य लोक गीत हैं। इसके अलावा असम के लोकप्रिय लोक नृत्यों में बागुरुम्बा (बोडो समुदाय का नृत्य) और भोरताल भी शामिल हैं।
कुटापो ओडिसी क्लासिकल डांस अकादमी, जो ग्रेटर नोएडा पश्चिम में बिसरख और दिल्ली के पांडव नगर के पास स्थित है, को उच्च रेटिंग प्राप्त है और इसकी औसत रेटिंग 4.9 से 5.0 स्टार है। समीक्षाओं में अकादमी की प्रशंसा उसके धैर्यवान प्रशिक्षकों, स्वागतपूर्ण वातावरण और सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए ओडिसी नृत्य के प्रामाणिक दृष्टिकोण के लिए की गई है।समीक्षा की मुख्य अंतर्दृष्टियाँप्रामाणिक प्रशिक्षण: छात्र और अभिभावक प्रशिक्षण की प्रामाणिकता पर प्रकाश डालते हैं, यह बताते हुए कि अकादमी पारंपरिक ओडिसी मुद्राओं, आसनों और पैरों की चाल के प्रति सच्ची बनी रहती है।धैर्यवान और प्रोत्साहित करने वाले शिक्षक: अर्बनप्रो जैसे प्लेटफार्मों पर समीक्षाओं में अक्सर उल्लेख किया जाता है कि प्रशिक्षक अत्यधिक सहायक होते हैं, बच्चों को कभी डांटते नहीं हैं और मैत्रीपूर्ण तरीके से अनुशासन का निर्माण करते हैं।
भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:उत्पत्ति और इतिहास: इन नृत्यों की जड़ें वेदों और नाट्य शास्त्र (भरत मुनि द्वारा रचित) से जुड़ी हुई हैं। प्राचीन काल में ये मुख्य रूप से मंदिरों में देवी-देवताओं की आराधना के रूप में किए जाते थे।दो प्रमुख अंग: शास्त्रीय नृत्यों में दो बातों पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है:नृत्य/नृत्त: जिसमें शुद्ध शारीरिक लय और ताल का प्रदर्शन होता है।अभिनय/नृत्य: जिसमें चेहरे के भाव (मुद्राओं) और हाथों के इशारों (हस्त-मुद्राओं) से कहानी कही जाती है।प्रमुख रूप: संगीत नाटक अकादमी द्वारा भारत में ८ शास्त्रीय नृत्यों को मान्यता दी गई है:भरतनाट्यम (तमिलनाडु) - अपनी ज्यामितीय (geometric) सटीकता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध।कथक (उत्तर भारत) - अपने चक्करों, पैरों की ताल (घुंघरू) और कहानियों के लिए मशहूर।कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश) - नृत्य, गीत और संवाद का अद्भुत मिश्रण।ओडिसी (ओडिशा) - भगवान जगन्नाथ को समर्पित, त्रिभंग मुद्रा और तरलता के लिए जाना जाता है।कथकली (केरल) - विस्तृत वेशभूषा और मुखौटों के जरिए रामायण-महाभारत की कथाओं का मंचन।सत्त्रिया (असम) - वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित, भक्ति और आध्यात्म पर केंद्रित।मणिपुरी (मणिपुर) - राधा-कृष्ण की रास लीला पर आधारित, अत्यंत कोमल और लास्य प्रधान नृत्य।मोहिनीअट्टम (केरल) - एकल महिला द्वारा किया जाने वाला अत्यंत सुंदर और मनमोहक नृत्य।