केवली कुम्भक प्राणायाम, प्लानि प्राणायाम से कुंडलिनी जागृति और पांच तत्व पे विजय ।
hatha yog
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केवली कुम्भक प्राणायाम, प्लानि प्राणायाम से कुंडलिनी जागृति और पांच तत्व पे विजय ।
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इसके अभ्यास के लिए उपयुक्त वातावरण चुने और अभ्यास के लिए नीचे कुछ बिछाकर पदमासन या सुखासन में बैठ जाएं। इसके बाद दोनों नासिका (नाक के छिद्र) से वायु को तब तक अंदर खींचे, जब तक फेफड़े समेत पेट में पूर्ण रूप से वायु न भर जाएं। इसके बाद सांस को तब तक रोककर रखें जब तक सांस को रोकना सम्भव हो। फिर दोनों नासिका छिद्रों से धीरे-धीरे सांस छोड़ें अर्थात वायु को बाहर निकालें। इस तरह इस क्रिया को तब तक करें, जब तक आप की इच्छा हो।
सावधानी-
इसका अभ्यास किसी योग गुरू की देख-रेख में ही करें।
रोगों में लाभ-
यह प्राणायाम अग्निप्रदीप्त को तेज करके पाचनशक्ति को बढ़ाता है और कब्ज की शिकायत को दूर करता है। इस प्राणायाम से प्राणशक्ति शुद्धि और आयु में वृद्धि होती है। इससे मन की चंचलता दूर होकर मन स्थिर व शांत होता है, जिससे व्यक्ति को समाधि की अवस्था में लाभ प्राप्त होता है। यह स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। इसके अभ्यास में सफल होने के बाद व्यक्ति कई दिनों तक बिना भोजन के रह सकता है तथा इस प्राणायाम को पूर्ण रूप से अभ्यास कर लेने पर व्यक्ति बिना हाथ-पैर हिलाएं पानी में तैर सकता है।
केवली प्राणायाम के अभ्यास की विधि-
ऊपर बताए गए वातावरण व स्थान में स्वास्तिकासन में बैठकर रेचक-पूरक किए बिना ही सामान्य स्थिति में सांस लेते हुए इच्छा के अनुसार प्राण वायु (सांस) को जिस अवस्था में हो, उसी अवस्था में रोक लेना और जितनी देर तक रोकना सम्भव हो रोककर रखना ही केवली प्राणायाम है।
अभ्यास से लाभ-
इसके अभ्यास से असामंजस्य दूर होता है, आयु बढ़ती है, ध्यान की एकाग्रता बढ़ती है और दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है।
इस प्राणायाम से कुण्डलिनी जागरण होती है, और सिद्धि प्राप्ति भी।