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जय गंगा मैया कथा | हरिणयकश्यप का वध | भाग -1

Tilak

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जय गंगा मैया कथा | हरिणयकश्यप का वध | भाग -1

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भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान! Watch the video song of ''Darshan Do Bhagwaan'' here -    • दर्शन दो भगवान | Darshan Do Bhagwaan | Sur...   Watch the Short story ''harinayakashyap ka vadh | bhaag -1'' now! Watch all the Ramanand Sagar's Jai Ganga Maiya full episodes here - http://bit.ly/JaiGangaMaiya Subscribe to Tilak for more devotional contents - https://bit.ly/SubscribeTilak मधुछंदा प्रलहाद को 8 वर्षों तक शिक्षा देते हैं। शिक्षा पूर्ण होने के बाद क्याधु प्रलहाद को असुरों के संस्कार ग्रहण कर्ण के लिए राजकुमारों की शिक्षा लेने के लिए कहती है। हरिणयकश्यप की तपस्या पूर्ण हो जाती है और ब्रह्मा जी उसे दर्शन देते हैं। हरिणयकश्यप ब्रह्मा जी से वरदान माँगता है। वह ऐसा वरदान माँगता है जिसे से वह कभी मर ना सके। वह ब्रह्मा जी से वरदान में माँगता है की उसे ना कोई नर मर सके ना पशु ना असुर ना देवता, ना ही अस्त्र से मरु ना ही शस्त्र से, ना दिन में मरु ना रात में, ना घर में मरु ना घर के बाहर। ब्रह्मा जी उसे वरदान दे देते हैं। हरिणयकश्यप के वरदान पाने से क्याधु को चिंता होती है। हरिणयकश्यप वरदान पाकर गंगा मैया को मिलता है और उन्हें कहता है की अब वह गंगा को अपने साथ असुर लोक ले जाएगा। अल्हाद अपनी माता सुमुखी को बताता है की हरिणयकश्यप की तपस्या समाप्त हो चुकी है और उन्होंने अपना वरदान पा लिया है। हरिणयकश्यप के असुर लोक जाने की बात सुन ऋषि मधुछंदा क्याधु और प्रलहाद को उनके घर वापस छोड़ने जाने की बात उन्हें कहते हैं। हरिणयकश्यप के असुर लोक में अपने राज महल में आने पर उसका स्वागत किया जाता है। हरिणयकश्यप क्याधु के बारे में पूछता है तो सुमुखी उसे सब कुछ बताती है। क्याधु के अपहरण की बात सुन हरिणयकश्यप को इंद्र पर क्रोध आ जाता है। हरिणयकश्यप के पास ऋषि मधुछंदा क्याधु और प्रलहाद को लेकर आते हैं। हरिणयकश्यप अपने पुत्र और क्याधु को देख कर प्रसन्न होता है। क्याधु को सपना आता है की हरिणयकश्यप प्रलहाद को मारने के लिए आता है। हरिणयकश्यप प्रलहाद की शिक्षा के लिए अपने आचार्य को बुलाते हैं और उसे गुरुकुल में शिक्षा लेने के लिए भेजते हैं। हरिणयकश्यप युद्ध के लिए जाने की बात कहता है तो प्रलहाद उसे कहता है की आप क्षीर सागर भी जाएँगे और लक्ष्मी पति से भी युद्ध करेंगे। हरिणयकश्यप कहता है की हाँ मैं करूँगा क्योंकि में परमेश्वर हूँ। प्रलहाद विष्णु के बारे में बखान करता है तो हरिणयकश्यप को उस पर क्रोध आ जाता है हरिणयकश्यप के सामने जब प्रलहाद ने विष्णु के भगवान होने और परमेश्वर होने की बात की तो हरिणयकश्यप को क्रोध आ जाता है। हरिणयकश्यप प्रलहाद पर वार करने के लिए तलवार निकलता है तो क्याधु उसे रोक देती है। हरिणयकश्यप वहाँ से देवताओं पर आक्रमण करने एक लिए निकल जाता है। इंद्र और अन्य देवता हरिणयकश्यप को मारने के लिए शस्त्र अस्त्र चलता है लेकिन हरिणयकश्यप पर उसका कोई असर नहीं होता। हरिणयकश्यप स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लेता है। प्रलहाद गुरुकुल में दूसरे बालकों को भगवान विष्णु के बारे में बताता है और विष्णु के मंत्र उच्चारण सिखाता है। तभी वहाँ आचार्य आ जाते हैं और उसे रोक देते हैं और विष्णु का नाम लेने के कारण दंड के रूप में भोजन ना देने के आदेश देते हैं। गंगा मैया प्रलहाद पास आती हैं और उसके खाने के लिए फल देती हैं और अपना जल से उसकी प्यास भी भूजती हैं। हरिणयकश्यप स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के बाद अल्हाद को बुलाता है और उसे कहता है की देवी गंगा को बंदी बना कर मेरे पास ले आओ। अल्हाद जब गंगा मैया के पास आता है तो वो गंगा मैया और देवी उमा को वहाँ देख कर ममता मय हो जाता है। अल्हाद गंगा मैया को अपने साथ चलने के लिए कहता है। अल्हाद गंगा मैया को आदर सहित अपने साथ चलने के लिए कहता है। लेकिन गंगा मैया उसे कहती है की मैं समय आने पर स्वयं वहाँ आ जाऊँगी लेकिन अभी सही समय नहीं आया है। अल्हाद गंगा को पकड़ने के लिए अपने सैनिक आगे भेजता है तो गंगा के जल में स्नान करते ही वो राक्षस दिव्य हो जाते हैं। अल्हाद हरिणयकश्यप के पास जाकर सब बताता है तो हरिणयकश्यप स्वयं गंगा मैया के सामने जाता है। हरिणयकश्यप गंगा मैया को स्वयं बंदी बनाने के लिए जाता है वहाँ गंगा मैया उसे जब समझाती है की मुझे बंदी बनाने के लिए तुम्हें मुझे स्पर्श तो करना ही होगा। गंगा मैया को जब हरिणयकश्यप पकड़ने के लिए जाता है तो उसे गंगा के जल से डर लगने लगता है जैसे वह उसे मार देगा। हरिणयकश्यप डरते हुए वहाँ से ब्रह्मा जी के पास जाता है और उनसे पूछता है की क्या उसे जल डूबा कर मार सकता है तो ब्रह्मा जी उसे बताते हैं की उसे जल डूबा कर नहीं मार सकता है। ब्रह्मा जी हरिणयकश्यप को बताते हैं की वह गंगा के जल में डूब कर मारेगा तो नहीं परंतु वह दिव्य हो जाएगा और उसे मुक्ति प्रपात हो जाएगी। प्रलहाद अपने साथियों को आश्रम में विष्णु जी के बारे में बताता है और उनको देखने की बात पर विष्णु जी को दर्शन देने के लिए प्रार्थना करता है। विष्णु जी प्रलहाद की विनती सुन वहाँ प्रकट हो जाते हैं। सभी असुर बालक और प्रलहाद विष्णु जी की जय जयकार करते हैं। आचार्य उन्हें ऐसा करते देख लेते हैं लेकिन उन्हें विष्णु जी नहीं देख रहे थे तो वह उनसे पूछते हैं की वो किसकी जय जयकार कर रहे हैं। प्रलहाद अपने गुरु को बताता है की वह विष्णु भगवान की जय जयकार कर रहे हैं। आचार्य प्रलहाद की बात पर क्रोधित हो जाते हैं और प्रलहाद को दंड देने की बात करते हैं। हरिणयकश्यप अपने पुत्र अल्हाद दोनों पत्नियों सुमुखी और क्याधु के साथ अपनी तीनों लोकों में जय जयकार की बात करता है।