सास-बहू की मज़ेदार पंचायत: रामकली की आलसी बहू vs सुमित्रा की हीरा बहू! 😅 | New Dehati Lokgeet #video
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सास-बहू की मज़ेदार पंचायत: रामकली की आलसी बहू vs सुमित्रा की हीरा बहू! 😅 | New Dehati Lokgeet #video
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सास-बहू की मज़ेदार पंचायत: रामकली की आलसी बहू vs सुमित्रा की हीरा बहू! 😅 | New Dehati Lokgeet #video
इस मज़ेदार और पारिवारिक देहाती लोकगीत में देखिए सास-बहू की अनोखी पंचायत! सुमित्रा बहना अपनी बहू की आदतों (देर तक सोना, दिनभर मोबाइल चलाना, काम से जी चुराना) से परेशान हैं, वहीं रामकली दीदी अपनी संस्कारी और काम में निपुण बहू की तारीफ करते नहीं थकतीं। गाने के अंत में एक बहुत ही प्यारा संदेश छुपा है—"बहू को बेटी मानोगी, तो वह भी हीरा बन जाएगी।" यह घर-घर की कहानी आपको हंसाने के साथ-साथ एक खूबसूरत सीख भी देगी।
वीडियो की मुख्य झलकियाँ
सुमित्रा की आलसी बहू vs रामकली की संस्कारी बहू की मज़ेदार तुलना।
एकदम ठेठ देहाती अंदाज़ और पारंपरिक संगीत।
सास-बहू के रिश्ते की खट्टी-मीठी नोकझोंक।
परिवार के साथ बैठकर सुनने लायक संपूर्ण पारिवारिक गीत।
अरी सुमित्रा बहना! मेरी बहू तो बहुत ही बुरी है... सुनो सुमित्रा, मेरी बहू कैसी है!
दिन चढ़े तक खटिया तोड़े, कभी ना अंगना बुहारे रे!
हाथ में उसके रहे मोबाइल, काम से जान चुरावे रे!
चाय बनावे तो बर्तन तोड़े, घर में करे मनमानी रे...
सुन ले सुमित्रा बहना, मोरी बानी रे!
अरी रामकली दीदी! मेरी बहू तो बहुत ही अच्छी है... सुनो रामकली दीदी, मेरी बहू कैसी है!
भोर भए से उठ जावे वा, झाड़ू-पोछा लगावे रे!
सास-ससुर के चरण छुए वा, मीठी चाय पिलावे रे!
पूरे घर को स्वर्ग बनावे, काम में है बड़ी सयानी रे...
सुन लो रामकली दीदी, मोरी बानी रे!
[Chorus]
अरे घर-घर की है यही कहानी, कोई राजा कोई रानी रे!
हाँ, घर-घर की है यही कहानी, कोई राजा कोई रानी रे!
[Verse 2]
सुमित्रा बहना! रसोई के काम में भी मेरी बहू बहुत ही बुरी है... सुनो सुमित्रा, मेरी बहू कैसी है!
रोटी बेले तो भारत का नक्शा, दाल में नमक मिलावे जादा!
सब्जी सादे पानी जैसी, काम करे वा आधा-आधा!
खुद तो खावे गरम-गरम वा, हमको देवे बासी रे...
सुन ले सुमित्रा बहना, मोरी बानी रे!
रामकली दीदी! रसोई के मामले में मेरी बहू बहुत ही अच्छी और नेक दिल है... सुनो रामकली दीदी, मेरी बहू कैसी है!
हाथों में उसके जादू ऐसा, भोजन अमृत जैसा लागे!
तीज-त्यौहार पे पकवान बनावे, खुशियां घर में भागे-भागे!
सबको खिला के अंत में खावे, दिल की बड़ी सादा रानी रे...
सुन लो रामकली दीदी, मोरी बानी रे!
[Chorus]
अरे घर-घर की है यही कहानी, कोई राजा कोई रानी रे!
हाँ, घर-घर की है यही कहानी, कोई राजा कोई रानी रे!
[Verse 3]
अरी सुमित्रा बहना! स्वभाव की तो पूछो ही मत, मेरी बहू तो बहुत ही बुरी है... सुनो सुमित्रा, मेरी बहू कैसी है!
कोई समझावे तो आँख दिखावे, उल्टी बहस लड़ावे रे!
अपने पति को मुट्ठी में रख के, मायके के गुण गावे रे!
रोज़ मंगावे नई-नई साड़ी, कर दी खत्म जवानी रे...
सुन ले सुमित्रा बहना, मोरी बानी रे!
रामकली दीदी! स्वभाव के मामले में मेरी बहू तो लाखों में एक है... सुनो रामकली दीदी, मेरी बहू कैसी है!
ऊंची आवाज़ में कभी ना बोले, सबका मान बढ़ावे रे!
सास-ससुर को मात-पिता सा, दिल से प्यार लुटावे रे!
जो मिल जाए उसी में खुश है, कोई ना खींच-तानी रे...
सुन लो रामकली दीदी, मोरी बानी रे!
[Outro]
सच कह रही हो सुमित्रा बहना... तेरी बहू तो सच में हीरा है! आज से मैं भी अपनी बहू को प्यार से समझाऊँगी!
हाँ रामकली दीदी! बहू को बेटी मानोगी, तो तुम्हारी बहू भी अच्छी बन जाएगी!
हँस के बितावा उमरिया सारी, प्यार से बीते जिंदगानी रे!
घर-घर की है यही कहानी, सुन लो मोरी बानी रे!
संगीत (Music): हारमोनियम, ढोलक, और वीणा की शानदार पारंपरिक धुन
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