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लोमश ऋषि की कथा | वो चींटी जो 72 बार इंद्र थी | अहंकार तोड़ देने वाली कथा

Naamjapofficial

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लोमश ऋषि की कथा | वो चींटी जो 72 बार इंद्र थी | अहंकार तोड़ देने वाली कथा

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लोमश ऋषि और 72 बार इंद्र बनी चींटी की यह कथा पुराणों की एक अद्भुत कथा है। जो एक बार सुन ले — उसका अहंकार धीरे-धीरे पिघलने लगता है। देवताओं के राजा इंद्र। वज्र के धारी। स्वर्ग के स्वामी। वृत्रासुर जैसे महाराक्षस का वध करने वाले। पर एक दिन... एक छोटी सी चींटी, एक ब्राह्मण बालक, और एक ऋषि की हँसी ने उनके सारे अहंकार को चूर-चूर कर दिया। ⏱ इस कथा के अध्याय: 00:00 परिचय 01:22 वृत्रासुर वध और इंद्र का गौर व 02:55 विशाल महल की योज ना 04:41 विश्वकर्मा की प्रार् थना 06:32 बालक का एक सवाल 08:45 ब्रह्मा की आयु का रहस्य 10:02 लोमश ऋषि क ा आगमन 12:20 चींटी और ऋषि की हँसी 14:29 इंद्र का सन्नाटा 16:23 बालक का रहस्य प्रकट — विष ्णु दर्शन 18:23 चींटी क ी ओर करुणा 20:19 समय की विशालता 22:19 समापन और सारइस कथा में आप देखेंगे —कैसे इंद्र अपने अहंकार में डूबकर ऐसा महल बनवाने लगे जो कभी पूरा ही नहीं होताकैसे विष्णु भगवान ने एक छोटे ब्राह्मण बालक का रूप लेकर इंद्र को सत्य दिखायाब्रह्मा जी की एक आयु में पाँच लाख चार हज़ार इंद्र क्यों आते-जाते हैंलोमश ऋषि कौन हैं — जिनकी एक बाल गिरने में एक ब्रह्मा की पूरी आयु बीत जाती हैवो चींटी जो 72 बार इंद्र रह चुकी थी — औ र उसका रहस्यइस अनंत समय-चक्र से बाहर निकलने का एकमात् र उपाय — नामयह कथा सिर्फ एक पौराणिक कहानी नहीं है। यह हम सब की कथा है। हम में से हर एक अपनी-अपनी परिधि में एक छोटा इंद्र है — कोई अपने घर का, कोई अपने दफ्तर का, कोई अपनी प्रसिद्धि का। और जब अहंकार बढ़ता है... तो पतन निश्चित है।पर एक चीज़ है जो इस चक्र से मुक्ति देती है। जो हमारे साथ अगले जन्म में भी जाती है। जो शक्ति, पद, महल — किसी भी सांसारिक वस्तु से बड़ी है। वो है — नाम।प्रभु का नाम। जो हृदय में बस जाए... तो अहंकार स्वयं गल जाता है। चिंताएं कम हो जाती हैं। भय मिट जाता है।यदि यह कथा आपके हृदय को छुए — तो कमेंट में लिखिए "जय श ्री राधे" 🙏 चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और बेल आइकन दबाइए ताकि आगे आने वाली बहुत सी ऐसी कथाएं आप तक पहुँचती रहें।हमारी स्वामिनी राधा रानी की कृपा से — यह नाम हम सबके हृद य में बस जाए। जय श्री राधे 🌸 #लोमशऋषि #इंद्रकीकथा #पौराणिककथा #नामजप #भक्ति