प्रकृति भले विपरीत खड़ी हो || Prakruti Bhale Viprit Khadi Ho || RSS || राष्ट्रचिंतक || Rashtrachintak
राष्ट्र चिंतक
0:00 / 0:00
प्रकृति भले विपरीत खड़ी हो || Prakruti Bhale Viprit Khadi Ho || RSS || राष्ट्रचिंतक || Rashtrachintak
28 678 просмотров · 11 месяцев назад
राष्ट्र चिंतक
14,5 тыс. подписчиков
28 678 просмотров · 11 месяцев назад
#rss #sanghgeet #shatabdivarsh #deshbhaktigeet #rashtriyaswayamsevaksangh #bharatmata #rashtrabhakti #sangathan
प्रकृति भले विपरित खड़ी हो, कालचक्र भी पड़े थामना
संकट के तूफानी सागर, चीर करेंगे सफल सामना
सतत् हमारी यही योजना, नित्य हमारी यही साधना – धृ
विकट परिस्थिति गुप्त सभी कुछ, रूप अनिश्चित अति अद्रश्य है
किन्तु सजग निर्भय सधैर्य हो, करना निश्चित धर्म-कृत्य है
अविरल जीवन चले जगत् में, सृष्टि धर्म की यही कल्पना – २
नित्य हमारी यही साधना
नये-नये ढंग विकसित होंगे, नयी-नयी पद्धति आयेंगी
संस्कृति वही पुरानी अपनी, जन-जीवन को सरसायेगी
चक्र-अखंडित यही सृष्टि का, यही सृजन की सहज धारणा – २
नित्य हमारी यही साधना
विघ्नों के गिरि अचल अनामिक, कदम-कदम हर पग रोकेंगे
भरी दुपहरी का रवि ग्रस लें, ऐसे राहु-केतु डोलेंगे
किन्तु अटल निर्बाध बढ़ें हम, जीवन की गति सहज भावना – २
नित्य हमारी यही साधना
सुख-दुःख-विपदा-बाधा-सुविधा, यही मार्ग मीलों के पत्थर
किन्तु इसी में आनंदित हो, खोजें हम उन्नति के अवसर
विजय सुनिश्चित भरतभूमि की, चाहे सागर पड़े बांधना – २
नित्य हमारी यही साधना