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Panch Mahaguru Bhakti - Prakrit (meaning) | पंच महागुरु भक्ति - प्राकृत (भावार्थ सहित)

Jain Parmarth

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Panch Mahaguru Bhakti - Prakrit (meaning) | पंच महागुरु भक्ति - प्राकृत (भावार्थ सहित)

437 просмотров · 3 месяца назад
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नमः सिद्धम् पंच महागुरु भक्ति - प्राकृत -- मणुयणाइंद - सुर-धरिय-छत्तत्तया, पंचकल्लाण - सोक्खावली-पत्तया। दंसणं णाण झाणं अणंतं बलं, ते जिणा दिंतु अम्हं वरं मंगलं॥ जेहिं झाणग्गि-बाणेहिं अइ-दड्ढयं, जम्म-जर-मरण-णयरत्तयं दड्ढयं। जेहिं पत्तं सिवं सासयं ठाणयं, ते महं दिंतु सिद्धा वरं णाणयं॥ पंचहाचार - पंचग्गि - संसाहया, बारसंगाइ - सुअ - जलहि-अवगाहया। मोक्ख-लच्छी महंती महंते सया, सूरिणो दिंतु मोक्खंगया संगया॥ घोर - संसार - भीमाडवी - काणणे, तिक्ख-वियरालणह-पाव-पंचाणणे। णठ-मग्गाण जीवाण पहदेसिया, वंदिमो ते उवज्झाय अम्हे सया॥ उग्ग-तव-चरण-करणेहिं झीणं गया, धम्म-वर-झाण-सुक्केक्क-झाणं गया। णिब्भरं तव सिरी ए समालिंगया, साहवो ते महं मोक्ख-पह-मग्गया॥ एण थोत्तेण जो पंचगुरु वंदए, गुरुय-संसार-घण-वेल्लि सो छिंदए। लहइ सो सिद्धि-सोक्खाइं बहुमाणणं, कुणइ कम्मिंधणं पुंज-पज्जालणं॥ अरुहा सिद्धा-इरिया उवज्झाया साहु-पंचपरमेष्ठी। एयाण-णमोयारा भवे भवे मम सुहं दिंतु॥   इच्छामि भंते! पंचमहागुरुभत्तिं काउस्सग्गो कओ, तस्सालोचेउं, अ-महा-पाडिहेर-संजुत्ताणं अरिहंताणं, अ-गुण-संपण्णाणं उड्ढ-लोय-मत्थयम्मि पइियाणं सिद्धाणं, अ-पवयण-माउ-संजुत्ताणं आयरियाणं, आयारादि-सुद-णाणोवदेसयाणं, उवज्झायाणं, ति-रयण-गुण-पालणरयाणं सव्वसाहूणं, णिच्चकालं, अंचेमि, पूजेमि, वंदामि, णमंसामि, दुक्खक्खओ, कम्मक्खओ, बोहिलाह , सुगइ-गमणं, समाहि-मरणं, जिण-गुण-संपत्ति होदु मज्झं। जय जिनेंद्र! पंच महागुरु भक्ति | पूर्ण अर्थ सहित | इच्छामि भंते! कायोत्सर्ग संकल्प 🙏 जैन धर्म में कायोत्सर्ग के समय पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण स्तुति — पंच महागुरु भक्ति का पूरा अर्थ, शब्द-दर-शब्द व्याख्या और भाव सहित। इस वीडियो में आप जानेंगे: • अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु — इन पाँच परमेष्ठी का विस्तार से अर्थ • इच्छामि भंते! का पूरा संकल्प और उसका गहरा भाव • कायोत्सर्ग के समय इसे कैसे पढ़ें और इसका क्या फल मिलता है अगर आप भी कायोत्सर्ग करते हैं या जैन धर्म की गहरी समझ चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए बहुत उपयोगी है। जय जिनेंद्र! 👍 वीडियो अच्छी लगे तो Like जरूर करें 🛎️ चैनल को Subscribe करें और Bell Icon दबाएँ 💬 कमेंट में लिखें — आप कायोत्सर्ग कितने समय का करते हैं? Jai Jinendra! Panch Mahaguru Bhakti | Complete Meaning | Ichchhami Bhante! Kayotsarg Sankalp 🙏 The most important Jain stuti recited during Kayotsarg — Panch Mahaguru Bhakti with full meaning, word-by-word explanation, and spiritual significance. In this video, you will learn: • Detailed meaning of all five Parmeshthis — Arihant, Siddha, Acharya, Upadhyaya, and Sadhu • Complete explanation of "Ichchhami Bhante!" Kayotsarg Sankalp • How to recite it during Kayotsarg and its spiritual benefits If you practice Kayotsarg or want to understand Jainism deeply, this video will be very helpful for you. 👍 If you liked the video, please Like & Share 🛎️ Subscribe to the channel and turn on the Bell Icon 💬 Comment: How long do you practice Kayotsarg? #PanchMahaguruBhakti #JainBhakti #YouthMotivation #Jainism #BhaktiGeet #JainGuru #spiritualsongs #jaindharma