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कुम्हार के दीये 🪔 | कर्म ही पूजा — दिवाली से पहले | युग बदला, गीता नहीं Ep 21

Bhakti Verse

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कुम्हार के दीये 🪔 | कर्म ही पूजा — दिवाली से पहले | युग बदला, गीता नहीं Ep 21

13 просмотров · 4 дн. назад
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दिवाली 8 नवंबर को है — और जयपुर के जयसिंहपुरा गाँव में कुम्हारों के चाक तेज़ घूम रहे हैं! पीढ़ियों से मिट्टी के दीये बनाने वाले परिवार दिन रात काम कर रहे हैं — हाथ से बने दीयों की माँग कारख़ानों के सस्ते विकल्पों के सामने भी बनी हुई है। (रिपोर्ट: अक्टूबर 2026) दुविधा: मशीनों के युग में — हाथ की बनी छोटी-सी मिट्टी की ज्योति का मोल क्या है? क्या छोटा, ईमानदार काम आज भी पवित्र है? इस एपिसोड में SarthiAI गीता के तीन सूत्र खोलता है: 1. गीता 9.27 — यत्करोषि यदश्नासि — जो कुछ तुम करते हो, मुझे अर्पण करो — काम प्रसाद बन जाता है 2. गीता 6.1 — अनाश्रितः कर्मफलम् — फल पर निर्भर न रहो — कर्तव्य ही योग है 3. गीता 18.46 — स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य — अपने कर्म से अर्चना करो — काम ही पूजा है परिस्थितियाँ बदलती हैं — गीता नहीं 🙏 इस दिवाली एक दीया कुम्हार के हाथ का भी जलाइए 🪔 🌐 https://bhaktiverse.com 🔔 YouTube:    / @mybhaktiverse   📸 Instagram: @bhaktiverse.bharat 👍 Facebook:   / anitesh.shaw   💬 WhatsApp: https://chat.whatsapp.com/HK8CX1Y4eKg... #युगबदलागीतानहीं #भगवद्गीता #BhaktiVerse #गीता #Diwali #Diya #Kumhar #Handmade #GitaWisdom #KarmaYoga