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"अत्र तत्र सर्वत्र" नारायण लक्ष्मी नारायण | श्री हरि की दिव्य विभूतियाँ | Narayan Bhakti Geet |

Rajendra Sachala Official

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"अत्र तत्र सर्वत्र" नारायण लक्ष्मी नारायण | श्री हरि की दिव्य विभूतियाँ | Narayan Bhakti Geet |

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नारायण, नारायण, नारायण, लक्ष्मी नारायण 🙏🪷 "अत्र तत्र सर्वत्र" नारायण लक्ष्मी नारायण | श्री हरि की दिव्य विभूतियाँ | Narayan Bhakti Geet | Lyrics - Rajendra Sachala यह दिव्य “नारायण विभूति भक्ति गीत” भगवान श्रीहरि विष्णु की उन अद्भुत विभूतियों का गुणगान करता है, जिनका वर्णन श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 10 विभूति योग में मिलता है। प्राणियों में आत्मा, आदित्यों में विष्णु, ज्योतियों में सूर्य, नक्षत्रों में चन्द्रमा, वेदों में सामवेद, रुद्रों में शंकर, पर्वतों में मेरु, नदियों में गंगा, शस्त्रधारियों में श्रीराम, पक्षियों में गरुड़ और पाण्डवों में अर्जुन—हर पंक्ति में भगवान की दिव्य महिमा का स्मरण है। 🙏 इस भक्ति गीत को सुनें, भगवान श्री नारायण और माता लक्ष्मी का स्मरण करें और भक्ति में लीन हों। 🌺 नारायण नारायण नारायण, लक्ष्मी नारायण। 🪷 जय श्रीहरि विष्णु। ॐ नमो लक्ष्मी नारायण। 🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। अगर आपको यह भक्ति गीत पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें।