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बस इस ग्रह का एक रत्न और फिर देखो कमाल, #astrology#horoscope#gemstones#prediction#kundali

Nakshatra Tak

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बस इस ग्रह का एक रत्न और फिर देखो कमाल, #astrology#horoscope#gemstones#prediction#kundali

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Nakshatra Tak
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अतिमित्र ग्रह जिसका रत्न व पाठ बनाएगा करोडपति, #astrology#horoscope#gemstones#prediction#kundali क्रम नक्षत्र स्वामी ग्रह देवता वृक्ष/पौधा (आराध्य) शुभ रंग 1 अश्विनी केतु अश्विनी कुमार कुचला/पीपल लाल, सफ़ेद 2 भरणी शुक्र यमराज आँवला लाल, श्वेत 3 कृत्तिका सूर्य अग्नि देव गूलर सफ़ेद, सुनहरा 4 रोहिणी चंद्र ब्रह्मा जामुन सफ़ेद, क्रीम 5 मृगशिरा मंगल चंद्रमा खैर सिल्वर, लाल 6 आर्द्रा राहु रुद्र (शिव) कृष्णगुरु/अग्रु नीला, काला 7 पुनर्वसु गुरु अदिति बाँस पीला, क्रीम 8 पुष्य शनि बृहस्पति पीपल सुनहरा, पीला 9 आश्लेषा बुध सर्प नागकेशर हल्का नीला 10 मघा केतु पितृगण बरगद काला, लाल 11पूर्वा फाल्गुनी शुक्र भग (आर्यमन) पलाश/ढाक भूरा, हल्का लाल 12 उत्तरा फाल्गुनी सूर्य भग (सूर्य) पाकर सुनहरा, लाल 13 हस्त चंद्र सवितृ (सूर्य) जाई/अमरूद गहरा हरा 14 चित्रा मंगल त्वष्टा (विश्वकर्मा) बेल लाल, सिल्वर 15 स्वाति राहु वायु अर्जुन काला, गहरा रंग 16 विशाखा गुरु इंद्र-अग्नि नागकेशर पीला, सुनहरा 17 अनुराधा शनि मित्र (आदित्य) मौलश्री/बकुल लाल, नीला 18 ज्येष्ठा बुध इंद्र लाल कपास लाल, नीला 19 मूल केतु निरृति (काल) साल/सरज काला, लाल 20 पूर्वाषाढ़ा शुक्र आपः (जल) जल बेंत सफ़ेद, क्रीम 21 उत्तराषाढ़ा सूर्य विश्वेदेव कटहल/पनस तांबा, सुनहरा 22 श्रवण चंद्र विष्णु मदार/आक हल्का नीला, हरा 23 धनिष्ठा मंगल आठ वसु शमी लाल, सिल्वर 24 शतभिषा राहु वरुण कदंब गहरा नीला, काला 25 पूर्वा भाद्रपद गुरु अजैकपाद आम पीला, सुनहरी 26 उत्तरा भाद्रपद शनि अहिर्बुध्न्य नीम नीला, काला 27 रेवती बुध पूषन महुआ हल्का नीला, हरा नव तारा चक्र (नवतारा चक्र) वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों के आधार पर ग्रहों के गोचर और दशा का विश्लेषण करने वाली 9 ताराओं की एक श्रृंखला है, जो जन्म नक्षत्र से गिनी जाती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से शुभ मुहूर्त, सफलता, विपत्ति और मानसिक सुख का आकलन करने के लिए किया जाता है। नव ताराओं का विवरण और उनका फल: जन्म नक्षत्र से गणना करने पर यह चक्र इस प्रकार है (हर 9 नक्षत्र बाद पुनरावृत्ति): जन्म (1, 10, 19): शारीरिक और मानसिक स्थिति, सामान्य। सम्पत (2, 11, 20): धन, समृद्धि और सुख। विपत (3, 12, 21): बाधाएं, दुर्घटना और मुसीबतें। क्षेम (4, 13, 22): सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्थिरता। प्रत्यरि (5, 14, 23): शत्रुता, विरोध और संघर्ष। साधक (6, 15, 24): सफलता, कार्य सिद्धि और प्रगति। वध (7, 16, 25): मृत्यु तुल्य कष्ट, विनाश और हानि। मैत्री (8, 17, 26): मित्रता, सहयोग और सुख। अति-मैत्री (9, 18, 27): विशेष मित्रता, अत्यधिक शुभ। महत्वपूर्ण बिंदु: अशुभ तारा: 3 (विपत), 5 (प्रत्यरि) और 7 (वध) ताराओं में शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। शुभ तारा: 2 (सम्पत), 4 (क्षेम), 6 (साधक), 8 (मैत्री) और 9 (अति-मैत्री) शुभ कार्यों के लिए उत्तम हैं। #Rashifal, #GrahaDosh, #Shani, #RahuKetu, #Kundli, #Horoscope, #DailyRashifal, #AstrologyReels, #NakshatraTak, #AstrologyExpert, #VedicAstrology, #AstrologerIndia, #AstrologyHindi, #Jyotish,