बहादुर शाह ज़फ़र को क्यों किया गया रंगून निर्वासित? | रंगून में ली अंतिम साँस |
Kissa - e - itihass
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बहादुर शाह ज़फ़र को क्यों किया गया रंगून निर्वासित? | रंगून में ली अंतिम साँस |
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1857 की क्रांति के बाद आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। अंग्रेज़ों ने उन्हें दिल्ली से दूर रंगून (आज का Yangon, Myanmar) निर्वासित कर दिया। आखिर क्यों एक बूढ़े बादशाह को अपने ही वतन से दूर भेजा गया?
इस वीडियो में जानिए बहादुर शाह ज़फ़र के निर्वासन की दर्दनाक कहानी, 1857 के बाद उनके साथ क्या हुआ और रंगून में उनके जीवन के आख़िरी दिन कैसे बीते। एक ऐसे बादशाह की कहानी, जिसने अपनी मातृभूमि से दूर अंतिम साँस ली।
उनसे जुड़ी मशहूर पंक्ति आज भी इतिहास के दर्द को बयां करती है—
“कितना है बदनसीब ज़फ़र, दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में।”
वीडियो को अंत तक देखें और भारतीय इतिहास की इस भावुक और दर्दनाक कहानी को जानें।
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