Episode 4:स्वराज्य का बीजारोपण और पुणे की जागीर
Shivshaahi Te Peshwai
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Episode 4:स्वराज्य का बीजारोपण और पुणे की जागीर
214 просмотров · 7 дней назад
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1636 में मुग़लों और बीजापुर की संयुक्त संधि ने दक्कन का नक्शा बदल दिया। शाहजी राजे भोसले को दक्कन छोड़कर दक्षिण (बेंगलुरु) जाना पड़ा, लेकिन जाने से पहले उन्होंने स्वराज्य की नींव रखने का एक ऐतिहासिक मास्टरस्ट्रोक खेला! मुग़लों की तबाही से श्मशान बन चुके पुणे की उजाड़ भूमि पर, जब 6 वर्ष के नन्हे शिवाजी ने सोने का हल चलाया, तो वह केवल मिट्टी को जोतना नहीं था—वह एक नए साम्राज्य के उदय का उद्घोष था! मावल के वीरों का संगठन, दादोजी कोंडदेव का मार्गदर्शन और राजमाता जीजाऊ के संस्कारों के साए में कैसे बोए गए स्वराज्य के पहले बीज? जानिए इस रोमांचक एपिसोड में! 📌 एपिसोड के मुख्य आकर्षण (Key Highlights):📜 1636 की ऐतिहासिक संधि: शाहजी राजे का दक्षिण प्रस्थान और पुणे की जागीर का मास्टरस्ट्रोक। 🌾 सोने का हल: श्मशान बने पुणे का पुनरुद्धार और राजमाता जीजाऊ का संकल्प। ⚔️ मावलों का संगठन: सह्याद्रि के जंगलों में तानाजी मालुसरे, येसाजी कंक और बाजी पासलकर के साथ गुप्त युद्ध प्रशिक्षण। 🔔 अगला एपिसोड देखें: Episode 5: रायरेश्वर की शपथ और तोरणा पर पहला परचम! अगर आपको हमारी यह ऐतिहासिक श्रृंखला पसंद आ रही है, तो Subscribe करें, Like करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!