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बहु पुण्य पुंज प्रसंग से | BAHU PUNYA PUNJ PRASANG SE | AMULYA TATTVA VICHAR | "SHRIMAD RAJCHANDRA"

Divyansh Jain Bhajan

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बहु पुण्य पुंज प्रसंग से | BAHU PUNYA PUNJ PRASANG SE | AMULYA TATTVA VICHAR | "SHRIMAD RAJCHANDRA"

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Divyansh Jain Bhajan
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DIVYANSH JAIN BHAJAN Youtube:    / @divyanshjainbhajan   Instagram:   / a_divine_piece   श्रीमत् राजचंद्र जी द्वारा रचित "अमूल्य तत्त्व विचार" का युगल जी बाबूजी द्वारा रचित हिंदी पद्यानुवाद प्रस्तुत है। Music based on:    • Bahu Punya Kera Punjthi |@SRMD | Salim Sul...   by ‪@SalimSulaimanMusic‬ LYRICS: ‪@JinSwaraofficial‬ बहु पुण्य-पुंज प्रसंग से,शुभ देह मानव का मिला। तो भी अरे! भव चक्र का,फेरा न एक कभी टला ||(1) सुख प्राप्ति हेतु प्रयत्न करते,सुक्ख जाता दूर है। तू क्यों भयंकर भाव-मरण,प्रवाह में चकचूर है||(2) लक्ष्मी बढ़ी अधिकार भी,पर बढ़ गया क्या बोलिये? परिवार और कुटुंब हैं क्या? वृद्धिनय पर तोलिये||(3) संसार का बढ़ना अरे!नर देह की यह हार है। नहिं एक क्षण तुझको अरे!इसका विवेक विचार है||(4) निर्दोष सुख निर्दोष आनंद,लो जहाँ भी प्राप्त हो। यह दिव्य अन्तस्तत्व जिससे,बन्धनों से मुक्त हो||(5) पर वस्तु में मूर्छित न हो,इसकी रहे मुझको दया। वह सुख सदा ही त्याज्य रे!पश्चात् जिसके दुःख भरा||(6) मैं कौन हूँ? आया कहाँ से?और मेरा रूप क्या? सम्बन्ध दुखमय कौन है?स्वीकृत करूँ परिहार क्या?||(7) इसका विचार विवेकपूर्वक,शांत होकर कीजिये। तो सर्व आत्मिक ज्ञान के,सिद्धांत का रस पीजिये||(8) किसका वचन उस तत्व की,उपलब्धि में शिवभूत है। निर्दोष नर का वचन रे!वह स्वानुभूति प्रसूत हैे||(9) तारो अरे! तारो निजात्मा,शीघ्र अनुभव कीजिये। सर्वात्म में समद्रष्टि दो,यह वच हृदय लख लीजियेे||(10)