Astitva Ka Satya is live भगवान का ज्ञान भगवान के शब्दों में जीवन कैसे जियें ? - ७२ / ३९३
Astitva Ka Satya
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भगवान की वाणी खंड ' जीवन कैसे जियें ? / १० सितंबर से साभार !
वर्तमान युग में भगवान का अवतरण लिपि रूप में दिनांक ३१ मार्च १९७२ को श्री कृष्ण चेतनावतार प. पू.देवी मां की भागवत शक्तिचालित लेखनी के माध्यम से हुआ। किसी माध्यम से अवतरिभगवानत ज्ञान जिसको भगवान की वाणी कहा गया ३ जनवरी २००० तक ४०० से ज्यादा वाणी खंडों में संकलित किया गया। लिपि रूप को भगवान ने अपना साकार दर्शन एवं वाणी को अपना शक्ति रूप दर्शन कहा। भगवान ने अपनी वाणी में बताया कि जो ज्ञान कृष्ण रूप में अर्जुन को दिया था वही गीता का ज्ञान वाणी के रूप में फिर से सरल से सरलतम रूप में सुना रहा हूं।
भगवान की वाणी
सत्य मंदिर,
B - 116/2 इंदिरा नगर
लखनऊ।
ॐ शिव: हरि: