Перейти к содержимому

Janmashtami 2025 | अब आओ रे इस्क भानूं हाम - इश्क की इच्छा | Vani Charcha by Shri Rajan Swami Ji

Shri Prannath Ji

0:00 / 0:00

Janmashtami 2025 | अब आओ रे इस्क भानूं हाम - इश्क की इच्छा | Vani Charcha by Shri Rajan Swami Ji

7 802 просмотра · 1 год назад
Shri Prannath Ji
9,69 тыс. подписчиков
7 802 просмотра · 1 год назад
Janmashtami 2025 | अब आओ रे इश्क भानू हाम - इश्क की इच्छा | Vani Charcha by Shri Rajan Swami Ji अब आओ रे इस्क भानूं हाम, देखूं वतन अपना निज धाम। करूं चरन तले विश्राम, विलसों पियाजी सों प्रेम काम।। श्री महामति जी की आत्मा कहती हैं कि हे प्रेम (इश्क)! अब तू मेरे दिल में आ जा, जिससे मैं अपनी चाहना पूरी कर लूं। मेरी यही इच्छा है कि मैं अपने मूल घर परमधाम को देख लूं तथा अपने प्रियतम के चरण-कमलों के दर्शन में ही आनन्द प्राप्त करती रहूं। मैं एकमात्र धाम धनी से प्रेम की ही कामना करती हूँ और उसी के आनन्द में डूबी रहना चाहती हूँ। भावार्थ- प्रेमी या प्रेमास्पद (आशिक या माशूक) के द्वारा एकमात्र प्रेम की ही इच्छा करना प्रेम काम कहलाता है। इसी प्रकार आनन्द में आत्मा का डूब जाना विश्राम करना कहलाता है। Go and Checkin Now - Instagram -   / shriprannathji   नोटः कृपया हमारे अधिकारिक युटयुब चैनल SPJIN को सब्सक्राइब जरूर करें - YouTube -    / @spjin   हमारे अन्य सामाजिक मीडिया जहां से आप हमसे आसानिसे जुड़ सकते हैं। Social Links (Please FOLLOW & LIKE) - Facebook:   / shri.prannath.jyanpeeth   Facebook :   / shri.rajan.swami   Website: https://www.spjin.org/ Email: shriprannathgyanpeeth@gmail.com WhatsApp: +91-7533876060 Find more about us at: https://www.spjin.org​ श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के मुख्य उद्देश्य - ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित आध्यात्मिक मूल्य द्वारा मानव को महामानव बनाना और श्री प्राणनाथ जी की ब्रम्हवाणी के द्वारा समाज में फ़ैल रही अंध-परम्पराओं को समाप्त करके सबको एक अक्षरातीत की पहचान कराना। अति महत्वपूर्ण नोट :- यह पंचभौतिक शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है। प्रियतम परब्रह्म को पाने के लिये यह सुनहरा अवसर है। अतः बिना समय गवाएं उस अक्षरातीत पाने के लिये प्रयास करना चाहिये।