पहाड़ों ने डाकू और राजकन्या को क्यों बुलाया? | राजा के सिर पर बैठा था 20 साल पुराना अंधेरा |
JUNOON VIBES и MJ. TALES
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पहाड़ों ने डाकू और राजकन्या को क्यों बुलाया? | राजा के सिर पर बैठा था 20 साल पुराना अंधेरा |
30 127 просмотров · 2 дн. назад
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क्या पहाड़ सचमुच इंसानों से बात करते हैं?
चंदेरगढ़ के महल की सबसे ऊँची खिड़की पर बैठी एक राजकन्या, जिसे सब पगली कहते थे, एक रात पहाड़ों की आवाज़ सुनती है। उसी रात गूँजघाटी की एक गुफा में एक डाकू भी वही पुकार सुन रहा था: "वो जाग गई है, उसे ढूँढ।"
कौन था वह दरबारी जिसका चेहरा राजकन्या के बहुत पास था? पीतल के दो आधे सिक्के किस दरवाज़े की चाबी थे? और बावड़ी के भीतर बीस बरस से कौन अपने बेटे का इंतज़ार कर रहा था?
इस वीडियो में सुनिए "पहाड़ों की भाषा", एक डाकू और एक राजकन्या की पूरी कहानी, जैसी हमारे दादा-परदादा सर्दियों की रातों में अँगीठी के पास सुनाया करते थे। इसमें रहस्य है, दोस्ती है, माँ की लोरी है, पुराने ज़ख्म हैं और एक ऐसा अंत है जो दिल को छू जाएगा।
कहानी पूरी सुनिएगा, क्योंकि सबसे बड़ा राज़ आख़िर में खुलता है।
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डिस्क्लेमर:
यह वीडियो पूरी तरह एक काल्पनिक लोककथा-शैली की कहानी है। इसमें दिखाए गए सभी पात्र, नाम, स्थान, राज्य और घटनाएँ लेखक की कल्पना की उपज हैं। इनका किसी वास्तविक व्यक्ति, जीवित या मृत, किसी स्थान, समुदाय, धर्म या ऐतिहासिक घटना से कोई संबंध नहीं है। यदि कोई समानता दिखती है, तो वह मात्र संयोग है। इस कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन है। इसके माध्यम से हम किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं चाहते, न ही अंधविश्वास या किसी गलत प्रथा को बढ़ावा देना चाहते हैं। कहानी में दिखाई गई अलौकिक शक्तियाँ और घटनाएँ केवल कथा-रस के लिए हैं। वीडियो में उपयोग की गई तस्वीरें और दृश्य केवल कहानी को समझाने के लिए बनाए गए हैं। देखने के लिए धन्यवाद।