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झूले नवल किशोर | जन्माष्टमी विशेष | 4 september murli song | BK MURLI SONGS #BrahmaKumaris

BK MURLI SONGS

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झूले नवल किशोर | जन्माष्टमी विशेष | 4 september murli song | BK MURLI SONGS #BrahmaKumaris

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आँगन में झूले नंद-किशोर, सखी री बाजे बंसिया… जन्माष्टमी पर यह गीत उस आँगन का है जहाँ रेशम की डोरी पर कंचन का पलना झूलता है, और उस नन्हे मुखड़े का है जिसके आने से सतयुग हँसता हुआ चला आया। मुरली के अनुसार श्रीकृष्ण सोलह कला सम्पूर्ण, नई दुनिया की बगिया का पहला पुष्प हैं — सतयुग के पहले राजकुमार। उनके जन्म की खुशी में सारा जग झूमता है, और हर मन पावन हो जाता है। "ऐसी पावन मूरत अपनी, आज संवारेंगे, तन-मन में सतयुग की खुशबू, प्रेम से धारेंगे।" 00:00 ओ कान्हा… बाजे बंसिया… 00:33 आँगन में झूले नंद-किशोर, सखी री बाजे बंसिया 01:24 रेशम डोरी, कंचन पलना, मंद पवन जब डोले 01:43 सोलह कला गुणों की मूरत, पहला पुष्प खिला 03:01 माखन-मिश्री भोग लगे हैं, दीप जले द्वारे 03:30 प्रेम की वर्षा ऐसी बरसी, नाचे चित का मोर 04:27 ऐसी पावन मूरत अपनी, आज संवारेंगे 05:58 झूले नंद-किशोर… ओ कान्हा… झूले नवल किशोर… ॐ शान्ति। #Janmashtami #जन्माष्टमी #BrahmaKumaris #MurliSong #Krishna #Satyug #BKMurliSongs